Philip And The Ethiopian Eunuch | फिलिप्पुस और कूश देश का अधिकारी | Acts 8:26-40

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Philip And The Ethiopian Eunuch | फिलिप्पुस और कूश देश का अधिकारी।  Baptism: If you believe with all your heart, you may. | Acts 8:26-40 | Sword Method

फिलिप्पुस और कूश देश का अधिकारी। 

Philip And The Ethiopian Eunuch
Contributed by Sweet Publishing

परमेश्वर आपसे बेहद प्रेम करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपके जीवन के लिए उसकी योजना अद्भुत है। आप यदि अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखें तो आप पाएँगे कि परमेश्वर ने बड़ी योजनाबद्ध तरीके से आपको बुलाया और अपना प्रेम प्रकट किया जिस वजह से आज आप परमेश्वर में आनंदित हैं।

परमेश्वर ने किसी न किसी को आपके पास ज़रुर सुसमाचार लेकर भेजा ताकि आप परमेश्वर के प्रेम को जान पाएँ परमेश्वर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करते हैं। आज के लेखांश में हम कुछ ऐसा ही पाते हैं। 

परमेश्वर सही समय पर अपने लोगों को हमारे पास भेजते हैं, ताकि हम परमेश्वर के प्रेम को और उसके वचन को समझ पाएं। कलीसिया के आरम्भिक दिनों में एक बार एक स्वर्गदूत ने फिलिप्पुस से कहा दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा जो यरूशलेम से गाजा को जाता है, जो कि एक रेगिस्तानी मार्ग है। 

फिलिप्पुस भी आज्ञाकारी था और उस मार्ग पर चल दिया। उस रास्ते में कूश देश का एक नपुंसक आ रहा था जो कि कुशियों की रानी कन्दांके का मंत्री और खजांची भी था। वह यरूशलेम में आराधना करने को आया हुआ था वह यरूशलेम से लौटते हुए अपने रथ पर बैठे-बैठे यशायाह भविष्यवक्ता की पुस्तक पढ़ रहा था। 

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तब आत्मा ने फिलिप्पुस से उसके रथ के निकट चलने के लिए कहा। फिलिप्पुस उसकी ओर दौड़ा और उसने उसे यशायाह की पुस्तक में से पढ़ते हुए सुना। फिलिप्पुस ने उससे पूछा “तू जो पुस्तक पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?” 

वो नपुंसक (खोजा) भी काफी ईमानदार था इसलिए उसने कह दिया कि जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं कैसे समझूं? ऐसा लगता है कि वो एक नम्र व्यक्ति भी था तभी उसने फिलिप्पुस से निवेदन किया कि उसके पास रथ पर बैठे और उसे समझाए। 

मंत्री पवित्र शास्त्र में से जो पढ़ रहा था वह यशायाह 53 अध्याय में से पढ़ रहा था। उसने फिलिप्पुस से विनती की कि मुझे बताएं भविष्यवक्ता यशायाह किसके बारे में कह रहा है? 

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फिलिप्पुस ने भी उसे इसी शास्त्र में से समझाना शुरु कर उसे प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाया क्योंकि यशायाह ने ये भविष्यवाणी यीशु के दुखभोग के बारे में की थी। जब वे रास्ते में किसी पानी की जगह पहुंचे तब मंत्री ने फिलिप्पुस से कहा कि यहाँ पर पानी है और अब मुझे बपतिस्मा लेने में क्या रोक है? 

फिलिप्पुस ने भी उससे कहा कि “यदि तू प्रभु यीशु पर सारे मन से विश्वास करता है तो बपतिस्मा ले सकता है।” मंत्री ने भी जल्दी से जवाब दिया कि “हाँ मैं विश्वास करता हूँ कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है।” तब मंत्री ने रथ को खड़ा करने की आज्ञा दी और वे दोनों पानी में उतर गये और फिलिप्पुस ने उसे बपतिस्मा दे दिया। 

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जब वे पानी में से बाहर आए तो प्रभु का आत्मा ने फिलिप्पुस को कहीं दूसरी जगह के लिए उठा लिया। वह नगर-नगर सुसमाचार सुनाता कैसरिया में पंहुचा फिलिप्पुस और खोजा फिर कभी न मिले, पर वह खोजा आनंद करता हुआ अपने मार्ग पर चला गया।     

ये घटना प्रेरितों 8:26-40 में वर्णित है। हमने देखा कि कैसे परमेश्वर एक व्यक्ति को सुसमाचार सुनाने के लिए किसी व्यक्ति को बड़े योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल करता है। आइए अब हम इसे तलवार विधि से अध्ययन करें। मुझे आशा है कि आप बाइबिल अध्ययन की इस विधि को इस्तेमाल कर रहे होंगे।

इस लेखांश में हम परमेश्वर के बारे में क्या सीखते हैं?

  • परमेश्वर मनुष्य को संदेश देने के लिए स्वर्गदूतों का भी इस्तेमाल करते हैं।
  • परमेश्वर मार्गदर्शन करता है।  
  • परमेश्वर हर एक व्यक्ति के बारे में जानता है।
  • परमेश्वर का आत्मा अगुवाई करता है। 
  • परमेश्वर हमारी समस्याओं के लिए समाधान देता है। 
  • परमेश्वर किसी व्यक्ति की मदद के लिए एक विश्वासयोग्य व्यक्ति के द्वारा मदद पहुंचाता है। 
  • परमेश्वर लिंगभेद नहीं करता है। 
  • परमेश्वर ही हमारे जीवन में आनंद का स्त्रोत है। 

इस लेखांश में हम मनुष्य के बारे में क्या सीखते हैं? 

  • विश्वासयोग्य व आज्ञाकारी मनुष्य परमेश्वर से अगुवाई पाते हैं। 
  • मनुष्य आराधना करने के लिए दूर-दूर की यात्रा भी करते हैं। 
  • वचन को समझने के लिए हमें कई बार अगुवों की भी आवश्यकता होती है। 
  • मनुष्य ईमानदार भी होते हैं। (मंत्री ने स्वीकार किया कि वह वचन समझ नहीं पा रहा है)  
  • जो व्यक्ति प्रभु यीशु पर सारे मन से विश्वास कर लेता है बपतिस्मा ले सकता है। 
  • आज्ञाकारिता जीवन में आनद को लाती है।

क्या इस लेखांश में किसी पाप का जिक्र है जिसे हमें छोड़ने की आवश्यकता है?

  • इस लेखांश में किसी भी पाप का जिक्र नहीं है। 

क्या इस लेखांश में कोई आज्ञा या उदाहरण है जिसे हमें अपने जीवन में लागू करने की आवश्यकता है?

  • इसमें मती 28:19-20 हमें स्पष्ट दिखाई देता है। 
  • उठ, जा। 8:26
  • यदि तू सारे मन से विश्वास करता है तो बपतिस्मा ले सकता है। 8:37
  • हमें भी फिलिप्पुस की तरह हमेशा आज्ञाकारी व उपलब्ध रहना चाहिए। 
  • हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए जिन्हें परमेश्वर के वचन को समझने में कठिनाई होती है। 
  • बपतिस्मा लेने के लिए हमें नए साल या छः महीने इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
  • परमेश्वर चाहे हमें जहाँ भी ले जाए हमें सुसमाचार सुनाते रहना चाहिए। 

कुछ जरुरी प्रश्न और उनके जवाब

बपतिस्मा क्या है? : बपतिस्मा यीशु के मारे जाने, गाड़े जाने और जी उठने का एक प्रतीक है। (रोमियों 6:3-4) यह इस बात का भी प्रतीक है कि हम अब अपने पुराने जीवन के लिए मर गए हैं और प्रभु यीशु के साथ नए जीवन के लिए जी उठे हैं। यह शुद्ध विवेक से अपने जीवन को परमेश्वर के हाथों में सौंपना है। 

हमें बपतिस्मा क्यों लेना है? : बपतिस्मा लेने का अर्थ यह घोषणा करना है कि यीशु हमारा प्रभु है। यीशु ने भी बपतिस्मा लिया है और हमें भी लेना है। यह आज्ञाकारिता का एक कदम है। (मती 3:13-15)

बपतिस्मा किसे लेना है? : बपतिस्मा उन सभी को लेना है जो अपने पापों से मन फिराते अर्थात पश्चाताप करते और प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं। (प्रेरित 2:38)

बपतिस्मा कैसे लेना है? : बपतिस्मा शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के Baptizo से हुई है जिसका अर्थ है डुबकी लगाना। इसलिए यीशु भी पानी में उतरे। (मती 3:16)

परमेश्वर आपसे बहुत प्रेम करते हैं इसलिए उनकी योजनाएं आपकी भलाई के लिए है और उन योजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए वो आपके जीवन में किसी व्यक्ति को भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने जीवन में जरुर परमेश्वर का धन्यवाद दें जिसने सही समय पर आपके जीवन में किसी व्यक्ति को भेजा ताकि आप परमेश्वर के प्रेम और वचन को समझें और अपने आत्मिक जीवन में उन्नति करें और आनंदित रहें।

शालोम

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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