क्या आत्मा से प्रचार करना एक खोई हुई कला है? | By Leonard Ravenhill

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क्या आत्मा से प्रचार करना एक खोई हुई कला है?

क्या आत्मा से प्रचार करना एक खोई हुई कला है? यह लेख “Why Revival Tarries?” नामक पुस्तक में से लिया गया है। इसमें लियोनार्ड बताते हैं कि एक प्रचारक होने के नाते हमें अपने सन्देश के प्रति गंभीर होना होगा। आज कलीसिया में भीड़ जरुर दिखती होगी पर क्या वे आत्मिकता में भी उतने ही मज़बूत हैं, ये एक बड़ा सवाल है? क्या प्रचारक अपने प्रचार को आज भीड़ के अनुरूप तैयार करते हैं या आज की नैतिकता की गिरावट को दूर करने के लिए अपने सन्देश को परमेश्वर के अनुरूप तैयार करते हैं?

सुसमाचार कोई पुरानी, पुरानी कहानी नहीं है, जो ताजा रूप में कही गई है। यह आत्मा में एक आग है, जो अमर प्रेम की लौ से पोषित है; और हम पर धिक्कार है, यदि परमेश्वर के उस वरदान को जो हम में है, उभारने में हमारी लापरवाही के कारण, वह आग कम जलती है। – Dr. R. Moffat Gautrey


कई सदियों पूर्व एक समाज सुधारक ओयकोलामपेडियस ने कहा था, “गुनगुने प्रचारकों के एक बड़े समूह की अपेक्षा, थोड़े से अच्छे और उत्सुक मनुष्य सेवकाई के कार्य में अधिक प्रभाव डाल सकते हैं!” समय के बीत जाने पर भी इस मुहावरे का असर कम नहीं हुआ है। हमें और अधिक अच्छे और उत्सुक प्रचारकों की जरूरत है। ‘हाय’ के साथ अपने अपराध को स्वीकार करने में यशायाह ऐसा ही एक मनुष्य था – “हाय! हाय! मैं नाश हुआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं।” (यशायाह 6:5) ‘हाय’ के साथ अपने दायित्व को स्वीकार करने में पौलुस भी ऐसा एक मनुष्य था – “यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं तो मुझ पर हाय!” (1 कुरिन्थियों 9:16)

पर इनमें से कोई भी अभिषिक्त मनुष्यों की, अपने कार्य की विशालता के प्रति ऐसी विचारधारा नहीं थी जितनी कि इंग्लैंड के रिचर्ड बेकस्टर की थी। उन पर ताना मारा गया कि वे सुस्त हैं इसका उत्तर उनसे सुनिए: “कृपया आप अपने परिश्रम के बदले मेरा आराम ले लीजिए। मैं इस बात को मानता हूं कि मैं सारे संतों में सबसे छोटा हूं। लेकिन मैं अपने दोष लगाने वालों को यह कहने में संकोच नहीं करता हूं कि मेरे परिश्रम की तुलना में शहर के सबसे व्यस्त नौकरी पेशा करने वाले लोग भी चैन आराम से हैं। फिर भी मेरे इस परिश्रम के बदले में यदि मुझे राजकुमार का स्थान भी मिल जाए तो भी मैं इस परिश्रम को छोड़कर उस स्थान को ग्रहण नहीं करूंगा।”

“उनके परिश्रम से उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है और मेरा क्षीण होता जाता है। वे आराम में कार्य करते हैं और मैं लगातार पीड़ा में। उनके पास कई घंटे और कई दिन मनोरंजन के लिए है; मुझे खाने और पीने के लिए भी मुश्किल से समय मिलता है। कोई उन्हें उनके परिश्रम के लिए कष्ट नहीं देता है, लेकिन मैं जितना परिश्रम करता हूं, उतना ही नफरत और कष्ट का सामना करता हूं।”

इस प्रकार के प्रचार में नए नियम का आत्म संस्कार दिखाई देता है। यह बेकस्टर हैं जिन्होंने सदा “मरते हुए मनुष्य की तरह, मरते हुए मनुष्यों के लिए” प्रचार करना चाहा। उसकी आत्म सामर्थ जैसे प्रचारक आज की पीढ़ी के पापियों को नर्क के लोभी मुंह से बचा सकते हैं।

हमें कलीसिया में लोगों की उपस्थिति ज्यादा से ज्यादा मिल सकती है लेकिन इसी के तुल्य आत्मिकता में ज्यादा से ज्यादा गिरावट भी मिल सकती है। यह हो सकता है कि पुराने समय में उदारवाद के विरुद्ध बहुत लोगों ने कहा कि यह लोगों को बहकाने वाला है। अब दूरदर्शन बलि का बकरा है, प्रचारकों का सारा श्राप उस पर है। यह सब कहने के बाद और यह जानते हुए कि दोनों आरोपों में सत्यता है, मैं क्या हम प्रचारकों से प्रश्न पूछूं: क्या हम एक पुराने सेवक की तरह कह सकते हैं “भाई, दोष हमारे ही अंदर है?” अपने विषय पर जोर देते हुए प्रचारकों से मैं क्या एक बात और पूछूं; क्या प्रभावशाली प्रचार जाता रहा? क्या आत्मा से प्रचार करना एक खोई हुई कला है? क्या लोगों के कान की खुजली के कारण यह प्रथा बन गई है कि उनको खुश करने के लिए वैसा ही प्रचार किया जाए? क्या कभी हमने यह सोचा है कि ऐसा प्रचार लोगों को आत्मिकता को बढ़ाने में सहायक होगा?

उस दिन (पिन्तेकुस्त) का सबसे बड़ा चमत्कार उन प्रतीक्षारत शिष्यों में किया गया परिवर्तन था। उनके अग्नि-बपतिस्मा ने उन्हें बदल दिया। – Samuel Chadwick

पौलुस पर विचार कीजिए, पवित्र आत्मा के सामर्थी अभिषेक के साथ वह आसिया को उलट – पुलट करने चल दिया, वहां के बाजारों में, और यहूदियों के आराधनालयों में उसने खलबली मचा दी और महलों में भी पहुंच गया। सुसमाचार की पुकार अपने हृदय और अपने होठों में लिए वह आगे बढ़ता ही रहा। “सच्चाईयां बड़ी कठोर वस्तुएं हुआ करती हैं।” इस मुहावरे को कहने के लिए लेनिन की प्रशंसा की जाती है। देखिए, ऐसा मुहावरा कितना ठीक है जब हम पौलुस के द्वारा किए गए कार्यों को देखते हैं? इस बात की तुलना जब हम आज के मसीहियों के साथ करते हैं तो संसार के साथ उनकी समझौता करने की दशा पर हमारा हृदय दुःख से भर जाता है। पौलुस न केवल शहर में प्रचार करने वाला था, परंतु शहर को हिला देने वाला भी था, और फिर भी उसके पास समय रहता था कि सड़क पर चलते-चलते घरों के दरवाजे खटखटाए और खोई हुई आत्माओं के लिए प्रार्थना करे।

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दुःख की बात है कि आज, सुसमाचार प्रचार एक व्यापार बनता जा रहा है। मेरी जानकारी में एक बड़े प्रचारक ने पांच सौ डॉलर प्रति सप्ताह के हिसाब से चार सप्ताह के लिए प्रचार का एक अनुबंध (Contract) तोड़ दिया। एक आधुनिकतावादी ने कहा इस बात में आश्चर्य नहीं है कि यह प्रचारक, लोगों की आत्माओं के लिए रोएंगे – यदि कीमत सही है तो – हाय, यहूदा की तरह, वह रोते रहेंगे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी! क्या मंच पर दुष्टता के कारण आज सभा में दुर्बलता हो सकती है? 

मसीहियत का चिन्ह एक क्रूस नहीं बल्कि आग की जीभ है। – Samuel Chadwick

मैं दृढ़ विश्वास करता हूं कि आंसू जागृति के प्रचार के लिए मुख्य भाग हैं। मेरे प्रचारक भाई, इस बात पर हमें शर्म आनी चाहिए क्योंकि हमारी आंखों में आंसू नहीं हैं। आज वह समय है कि हम अपने आंसुओं की कमी के लिए रोएं, आज वह समय है कि हम और नीचे झुक जाएं क्योंकि हमने दास होने का दीन पद खो दिया है। आज मातम करने का समय है क्योंकि हमारे पास कोई बोझ नहीं है, आज अपने से क्रोधित होने का समय है क्योंकि इस “अंत के समय” में शैतान के एकाधिकार पर हमारे अंदर क्रोध नहीं है। आज अपने को ताड़ना देने का समय है कि संसार कितनी आसानी से हमारे साथ-साथ चल रहा है।

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पिंतेकुस्त का अर्थ था पीड़ा, फिर भी हमारे पास कितना मनोरंजन है। पिंतेकुस्त का अर्थ था बोझ, लेकिन हम आराम पसंद करते हैं। पिंतेकुस्त का अर्थ था बंदीगृह, लेकिन हममें से बहुत से लोग मसीह यीशु के कारण बंदीगृह में जाने के अलावा और सब कुछ कर सकते हैं। यदि पहली सदी का पिंतेकुस्त पुनः जीवित हो जाए तो हम में से बहुतों को बंदीगृह में जाना पड़ जाएगा। पिंतेकुस्त, मैं यह नहीं कह रहा हूं पिंतेकुस्तवाद – और मैं पत्थर नहीं फेंक रहा हूं। 

अपनी कलीसिया में इस रविवार को पिंतेकुस्त की कल्पना कीजिए; मान लीजिए, पतरस की तरह आपने सामर्थ पाई और यदि आपके शब्द पर भाई हनन्याह और उसकी पत्नी प्राण छोड़ देते हैं, तो क्या आज के आधुनिकतावादी इसको सहन कर पाएंगे? फिर देखिए यहां पौलुस है जिसने इलिमास को अंधा कर दिया। इन दिनों में तो इस बात पर किसी प्रचारक पर कोर्ट केस हो जाएगा! मुंह के बल गिर कर पश्चाताप करना भी जो हर जागृति के प्रचार में होता रहा है “इससे हमें बदनामी ही मिलेगी।” क्या हमारे नाजुक हृदय के लिए यह सहने से बाहर नहीं है? 

सुसमाचार एक सच्चाई है; इसलिए इसे सरलता से बताएं। सुसमाचार एक हर्षित तथ्य है; इसलिए इसे खुशी से बताएं। सुसमाचार एक सौंपा गया तथ्य है; इसलिए इसे विश्वासयोग्यता से बताएं। सुसमाचार अनंत क्षण का तथ्य है; इसलिए इसे ईमानदारी से बताएं। सुसमाचार अनंत प्रेम का एक तथ्य है; इसलिए इसे भावना से बताओ। सुसमाचार बहुतों के लिए कठिन समझ का एक तथ्य है; इसलिए इसे दृष्टांत के साथ बताएं। सुसमाचार एक व्यक्ति के बारे में एक सच्चाई है; इसलिए मसीह का प्रचार करो। -Archibald Brown

मैं फिर से शाही प्रचार पर जैसा कि मैंने इस लेख के शुरू में कहा है गौर करने को कह रहा हूं। शैतान चाहता है कि हम नाबालिगों पर हावी हों। हम में से बहुत से जो “गहरे जीवन” के वर्ग में हैं – चूहे के शिकार में लगे हुए हैं – जबकि शेर देश को उजाड़ने में लगे हुए हैं। पौलुस को अरब में क्या हुआ मैं इसे कभी जान ना पाया, कोई नहीं जानता। क्या उसने नए आकाश और नई पृथ्वी की एक झलक देखी और प्रभु को सब पर राज्य करते देखा? मैं अभी भी इस बात को नहीं जानता; लेकिन इतना पक्का है कि उसने एशिया को बदल दिया, यहूदियों में हलचल पैदा कर दी, रोम वासियों को क्रोधित किया, शिक्षकों को पढ़ाया और बंदीगृह के दरोगा पर दया की। इस व्यक्ति पौलुस ने और दूसरे व्यक्ति सीलास ने “प्रार्थना से” बंदीगृह की दीवारें हिला दी। इससे करदाताओं पर बोझ तो जरूर पड़ा होगा परंतु इन दोनों को अपने स्वामी के कार्य को पूरा करना था। 

सच्चा उपदेश ‘खून का पसीना’ है। – Dr. Joseph Parker

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पौलुस बंधुआ-गुलाम है, पौलुस प्रेम का गुलाम है, इस बात को जान लेने के बाद कि वह सबसे कठोर हृदय वाला व्यक्ति था जिसको परमेश्वर ने बदला, कई शहरों को परमेश्वर के लिए हिलाने को निकल पड़ा। अपने समय में उसने संसार की ताकतों को हिला दिया, शैतान का सामना किया, और हम सबसे ज्यादा उसने प्रार्थना की, वह अप्रिय जाना गया, उसने दुःख उठाया। भाइयों, फिर से हम अपने घुटनों पर आ जाएं ताकि प्रेरितों की सामर्थ और प्रेम को जान सकें। नीरस प्रकार के प्रचार को हम बंद कर दें!


(Taken from the book, Why Revival Tarries? By Leonard Ravenhill)


मेरे प्रिय भाइयो, यदि आज हमें परमेश्वर के लिए आत्माओं को जीतना है तो हमें अपने प्रचार या संदेश को वचन के साथ जरुर मिलान करना चाहिए। अपने संदेश या प्रचार से हटा दीजिये ऐसी बातें जो कि लोगों की कानों की खुजली को मिटाती हैं। इसके बजाय आपके सन्देश में ऐसी गंभीरता पाई जाए कि वेदी पश्चातापी व्यक्तियों से भर जाए। संसार पश्चाताप करे और मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करे!

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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