Authenticity Of The Bible | Why Should I Believe The Bible? | बाइबल सबसे भरोसेमंद, अलग और अद्वितीय पुस्तक क्यों है? 

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Authenticity Of The Bible | Why Should I Believe The Bible? | बाइबल सबसे भरोसेमंद, अलग और अद्वितीय पुस्तक क्यों है? आज बहुत से लोग बाइबल की सटीकता पर संदेह करते हैं या बहुत से लोग बाइबल को भी एक मामूली किताब समझते हैं। एक मसीही व्यक्ति जानता है कि बाइबल एक जीवित पुस्तक है। बाइबल ही एकमात्र ऐसी पुस्तक है जिसका लेखक हमेशा से जिंदा था, है और रहेगा। मुझे विश्वास है कि बाइबल की सत्यता के बारे में यह लेख आपको साहस के साथ सुसमाचार सुनाने में मदद करेगा।

हमने पिछले पोस्ट में बताया था कि बाइबल जीवते परमेश्वर का जीवता वचन है। तो सवाल यह भी उठता है कि यदि बाइबल परमेश्वर की ओर से है तो इसे अद्वितीय (Unique) होना चाहिए। आज हम इसी विषय में बात करने वाले हैं आप पूरी पोस्ट जरूर पढ़ें। आपको एक मसीही होने पर गर्व होगा कि आपके पास परमेश्वर का एक नायाब तोहफा है।

Authenticity Of The Bible
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हमारा प्रयास यह है कि प्रत्येक विश्वासी तथा इस पोस्ट का अध्ययन करने वाले की रुचि बाइबल के प्रति बढ़ सके तथा वह विश्वास करे कि बाइबल पवित्र आत्मा के सामर्थ में भक्तजनों के द्वारा अद्भुत तरीके से लिखा गया है तथा यह परमेश्वर का जीवित और पवित्र वचन है। (2 पतरस 1:21)

बाइबल सबसे भरोसेमंद, अलग और अद्वितीय पुस्तक क्यों है?

  • बाइबल परमेश्वर के वचन होने का दावा करता है।
  • लेखकों में सहमति अथवा एकता।
  • ऐतिहासिक सटीकता और पुरातात्विक प्रमाण।
  • बाइबल के अलावा दूसरे 4 समकालीन लेखकों द्वारा प्रमाण।
  • वैज्ञानिक सटीकता की वजह से।
  • पूर्ण हुई भविष्यवाणियों के कारण। 
  • अद्भुत सुरक्षा के कारण।
  • सर्वदा प्रासंगिक होने के कारण।
  • जीवन को परिवर्तित करने वाला होने के कारण।

कुछ लोगों का मानना है कि बाइबल किसी काम का नहीं, तो कुछ लोगों का मानना है कि इसमें अजीब पौराणिक कथा है। कुछ लोग कहते हैं कि यह बहुत अच्छा साहित्य है। कुछ लोग कहते हैं कि यह आज की संस्कृति के लिए बहुत अच्छा है। कुछ लोगों का मानना है कि बाइबल सत्य और भरोसे के योग्य है और कुछ लोग कहते हैं कि बाइबल जीवन को परिवर्तित करने वाले सिद्धांतों से भरा हुआ है। कुछ लोगों का यह भी मानना है यह मनुष्य की सोच नहीं है, यह परमेश्वर के द्वारा प्रेरित है।

आप इस विषय में क्या सोचते हैं? आइए साथ मिलकर जानते हैं कि हम बाइबल पर विश्वास क्यों करें। 

हम बाइबल पर विश्वास क्यों करें? 

बाइबल परमेश्वर के वचन होने का दावा करता है।

सर्वप्रथम हमें बाइबल पर इसलिए विश्वास करना चाहिए क्योंकि ये परमेश्वर का जीवित वचन है। बाइबल परमेश्वर के वचन होने का दावा करता है। हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर के प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश और समझाने और सुधारने और धार्मिकता की शिक्षा के लिए लाभदायक है। (2 तीमुथियुस 3:16-17) “परमेश्वर के पवित्र जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर बोलते थे।” (2 पतरस 1:21) पवित्र आत्मा पुष्टि करता है कि बाइबल परमेश्वर का वचन है। (यूहन्ना 16:13)

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित और प्रबल और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है और जीव और आत्मा को और गांठ-गांठ और गूदे-गूदे को अलग करके आर पार छेदता है और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। (इब्रानियों 4:12) परमेश्वर का वचन ही हमें प्रोत्साहित करता है कि हम इस संसार के सदृश्य ना बनें परंतु हमारे मन के नए होने से हमारा चालचलन भी बदलता जाए, जिससे हम परमेश्वर की भली और भावती और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहें। (रोमियों 12:2)

जैसा कि हमने पिछले पोस्ट में जाना था कि बाइबल में 66 पुस्तकें हैं। पुराने नियम में 39 और नए नियम में 27 पुस्तकें है। ये पुस्तकें 1500 वर्षों के अंतराल में लिखी गई हैं। बाइबल की प्रेरणा का एक और प्रमाण इसकी एकता में पाया जाता है। 3000 से अधिक स्थानों पर, बाइबल स्वयं को प्रेरित घोषित करती है। यह कहीं भी स्वयं का खंडन नहीं करता है।

उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक, यीशु अपने विभिन्न रूपों में प्रकट हुए हैं। पंचग्रंथ (पहली पांच पुस्तकें) में, यीशु प्रकट हुआ है। उत्पत्ति में, मसीह हमारा सृष्टिकर्ता व उद्धारकर्ता है। निर्गमन में, मसीह हमारा शरणस्थान, हमारा आश्रय और हमारा उद्धारकर्ता है। लैव्यव्यवस्था में, मसीह हमारा बलिदान, महायाजक और न्यायी है। गिनती की पुस्तक में, मसीह हमारे मार्गदर्शक हैं। व्यवस्थाविवरण में, मसीह हमारे प्रतिफल के रूप में प्रकट होता है। प्रकाशितवाक्य और दानिय्येल की पुस्तकों में, हम मसीह को अपने न्यायी के रूप में देखते हैं। हम पाते हैं कि मसीह के ये पहलू पूरे बाइबल में प्रकट हुए हैं। वह इजराइलयों के लिए दिन में बादल का खंबा और रात में उनके लिए आग के रूप में उनकी सुरक्षा था। हम आगे बढ़ सकते हैं…. कहने की जरूरत नहीं है कि यह किताब एक चमत्कार है। 

बाइबल सदियों और यहाँ तक कि सहस्राब्दियों से जीवित रही है। शैतान द्वारा इसे छुपाने, नष्ट करने और आम व्यक्ति के लिए इसे दुर्गम बनाने के सभी प्रयासों के बावजूद, बाइबल को परमेश्वर द्वारा संरक्षित किया गया है। “यहोवा के वचन शुद्ध वचन हैं।” (भजन संहिता 12:6-7) यीशु ने यह भी प्रतिज्ञा की है कि “आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरे वचन टलेंगे नहीं।” (मत्ती 24:35)

भजन संहिता 119:160 कहता है, “तेरा वचन आरम्भ से ही सत्य है।” यूहन्ना 17:17 में हम पढ़ते हैं, “तेरा वचन सत्य है।” बाइबल के सबसे लम्बे अध्याय का मुख्य विषय वस्तु परमेश्वर के वचन की विश्वसनीयता और धार्मिकता है। (भजन संहिता 119) बाइबल की प्रेरणा का सबसे बड़ा प्रमाण उसके द्वारा प्रकट किए गए मसीह में और इसका अध्ययन करने वालों में परिवर्तन (यूहन्ना 5:39; प्रेरितों के काम 4:12; मत्ती 11:26-28) में है। परमेश्वर ने विभिन्न काल, पृष्ठभूमि, भाषा, संस्कृति के लेखकों का उपयोग किया। जैसे कि….

  • मूसा – अगुवा था।
  • यहोशू – सैनिक था।
  • शमूएल – पुरोहित था।
  • दाऊद – राजा था।
  • ऐस्तेर – रानी थी।
  • रूत – गृहणी थी।
  • एज्रा – शास्त्री था।
  • यशायाह – भविष्यवक्ता था। 
  • दानिय्येल – प्रधानमंत्री था। 
  • मत्ती – टैक्स लेने वाला था।
  • लूका – वैद्य था।
  • पतरस – मछुआरा था।
  • पौलुस – एक महान विद्वान था। 

लेखकों में सहमति अथवा एकता।

हमें बाइबल पर इसलिए भी विश्वास करना चाहिए क्योंकि इसके मानव लेखक आपस में एकमत थे। बाइबल की पुस्तकें 40 से अधिक लेखकों द्वारा लिखी गई हैं जिनमें से अधिकांश अलग-अलग पृष्ठभूमि के थे। उनमें से ज्यादातर लोग एक दूसरे से कभी नहीं मिले थे। फिर भी उनमें विरोधाभास नहीं है। उनका विषय एक है। यदि हम आज 40 लोगों को एक कमरे में लेकर ये प्रयोग करें: जो कि पढ़ाई में, सामाजिक प्रतिष्ठा में, पृष्ठभूमि में एक जैसे हों फिर भी उनकी विचारधारा में फर्क होगा। वे शायद एक बात में सहमत न हों! पर बाइबल के सभी लेखक एक ही नायक यीशु के बारे में लिखते हैं, मानवता के छुटकारे के विषय बात करते हैं और पाप की उत्पति और समाधान के बारे में बताते हैं। 

इतने सारे लेखकों के होने के बावजूद भी वे एकमत थे: उनके इतिहास के संग्रह में, ईश्वर कैसा है? उनका विचार एक जैसे थे। भविष्य के बारे में पूर्वानुमान में वे एकमत थे। मनुष्य के पाप के प्रति उनका दृष्टिकोण के प्रति एकमत थे। जीने के लिए नियम कानून के बारे वे एकमत थे। वे सभी सहमत थे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय, इजरायल का उदय और इतिहास के बारे में, दुनियां में सुसमाचार प्रचार के बारे में इत्यादि। सभी के लेख एक ही विषय के संपूरक हैं। इससे प्रमाणित होता है कि बाइबल का असली लेखक पवित्र आत्मा है। (2 पतरस 1:21)

ऐतिहासिक सटीकता और पुरातात्विक प्रमाण।

हमें बाइबल पर इसलिए भी विश्वास करना चाहिए क्योंकि बाइबल में कोई भी त्रुटि नहीं है, प्रारंभ में जैसा था हूबहू आज भी वैसा ही है। आइए जानते हैं कि बाइबल किन क्षेत्रों में सटीक होने का दावा करता है?

हेली की बाइबल हैंडबुक के अनुसार 112 जगह और घटनाएं प्रमाणित हैं। नेल्सन ग्लूक कहते हैं कि “किसी भी पुरातत्व खोज ने बाइबल के संदर्भों को गलत नहीं ठहराया है।” “इसमें कोई संदेह नहीं है कि पुरातात्विक खोजों ने पुराने नियम को ऐतिहासिक होने की पुष्टि की है।” – डॉक्टर विलियम अलब्राइट

एतिहासिक सटीकता।

पुरातात्विक खोजों के अनुसार बेबीलोन के गुम्मट की, नूह का जहाज की, सदोम और अमोरा का विनाश, यरीहो का पतन, सुलेमान के खजाने, यहेजकेल की सुरंग इत्यादि सैकड़ों घटनाओं की पुष्टि हो चुकी है।

मूसा – बाइबल इस तथ्य को दर्ज करती है कि मूसा ने बाइबल की पहली 5 पुस्तकें लिखीं, और यीशु ने इन्हें नए नियम में सत्यापित किया। कई सालों तक, अविश्वासी इतिहासकार इस विचार पर हंसते रहे कि मूसा ने पंचग्रंथ को लिखा था। उन्होंने कहा, “यह असंभव है”, क्योंकि जब मूसा रहता था तब कोई लिखित भाषा नहीं थी! पुरातत्वविदों ने अपना काम जारी रखा, और 1887 में उत्तर मिस्र में 300 मिट्टी की पट्टियों का पता चला, हम उन्हें “टेल-अल-अरमाना” (Tell el-Amarna) पट्टियों के रूप में जानते हैं। वे क्या कर रहे थे? मिस्र और फ़िलिस्तीन के बीच पत्र और व्यापारिक लेन-देन, मूसा के जन्म से भी सदियों पहले के हैं। और अब यह साबित हो गया है कि उनके पास न केवल एक लिखित भाषा थी, बल्कि उनकी डाक सेवा भी थी!

दानिय्येल – क्या आपको दानिय्येल की किताब में बेलशस्सर को दीवार पर लिखा हुआ सन्देश याद है? सदियों से इतिहास ने पौराणिक कथाओं के रूप में उस कहानी का मज़ाक उड़ाया, जिसमें कहा गया था कि उनके पास बेबीलोन के रिकॉर्ड हैं, जो बताते हैं कि बाबुल का अंतिम राजा बेलशस्सर (Belshazzar) नहीं था, बल्कि Nabonidus था। असल में, वे कहते हैं, हमारे पास कहीं भी कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कोई बेलशस्सर कभी रहता था! 

एक दिन पुरातत्वविदों को एक पट्टी मिली जिसने सच्चाई का खुलासा किया। Nabonidus बेलशस्सर का पिता था, और वे सह-राजदूत थे, एक साथ शासन कर रहे थे! Nabonidus ने दुनियां की यात्रा की, उनके बेटे ने राज्य पर शासन किया। अब हमें दानिय्येल 5:16 की बेहतर समझ है।

परन्तु मैं ने तेरे विषय में सुना है कि दानिय्येल भेद खोल सकता और सन्देह दूर कर सकता है। इसलिये अब यदि तू उस लिखे हुए को पढ़ सके और उसका अर्थ भी मुझे समझा सके, तो तुझे बैंजनी रंग का वस्त्र, और तेरे गले में सोने की कण्ठमाला पहिनाई जाएगी, और राज्य में तीसरा तू ही प्रभुता करेगा।” – (दानिय्येल 5:16 HINOVBSI)

क्या होता अगर वह पट्टी कभी नहीं मिली होती? क्या हमें बाइबल पर संदेह करना चाहिए? हमें बिल्कुल भी संदेह नहीं करना चाहिए! लेकिन क्या यह बहुत बढ़िया नहीं है कि कैसे परमेश्वर अपने सत्य को प्रकट करता है?

लूका – 1800 के दशक के अंत में 1900 की शुरुआत में सर विलियम रैमसे (William Ramsey) एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् और इतिहासकार थे। वह एबरडीन विश्वविद्यालय (Aberdeen University) में मानविकी के प्रोफेसर थे। उन्हें एशिया-माइनर में भूगोल और इतिहास पर दुनियां का सबसे विद्वान माना जाता था। उसने प्रेरितों के काम की पुस्तक पढ़ी और कहा: 

“प्रेरितों के काम की पुस्तक आरम्भिक मसीही धर्म का एक अत्यधिक कल्पनाशील और सावधानीपूर्वक रंगीन विवरण है” (संक्षेप में, “इतिहास के मेरे ज्ञान के अनुसार, मुझे एक इतिहासकार के रूप में लूका के लिए कोई सम्मान नहीं है”)

फिर वह अपने इतिहास में बाइबल को गलत साबित करने के स्पष्ट उद्देश्य के लिए मध्य पूर्व में गया। उसने घर आकर पुस्तक लिखी, “लूका, प्रिय चिकित्सक” जिसमें उसने चिकित्सक लूका को दुनियां के अग्रणी इतिहासकारों में से एक घोषित किया।

यहाँ सर विलियम रैमसे का एक उद्धरण है … यह सबूतों को ध्यान से देखने के बाद था: “मैं इस विचार को मानता हूं कि लूका का इतिहास अपनी विश्वसनीयता में नायाब है। आप लूका के शब्दों को किसी भी अन्य इतिहासकार से परे एक हद तक दबा सकते हैं, और वे सबसे गहरी जांच, और सबसे कठोर उपचार होंगे।”

पुरातात्विक साक्ष्य।

बाइबल में 44 विभिन्न लेखकों द्वारा 1500 साल की अवधि में लिखी गई 66 पुस्तकें हैं। इसकी कहानियों और इसके इतिहास में रहने वाले लोगों की प्रामाणिकता को 1948 में Dead Sea Scrolls की खोज से प्रमाणित किया गया है।

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स्क्रॉल 150-170 ईसा पूर्व के हैं और एस्तेर की पुस्तक को छोड़कर सभी पुराने नियम की पुस्तकों के कुछ हिस्सों को शामिल करते हैं। कई अन्य खोजों ने बाइबल के कई विवरणों को साबित करने में मदद की है जिनका उच्च आलोचकों द्वारा उपहास किया गया था।

1879 में खोजा गया साइरस सिलेंडर (The Cyrus Cylinder) साइरस के बाबुल को उखाड़ फेंकने और यहूदी बंधुओं के उसके बाद के छुटकारे को रिकॉर्ड करता है।

Why Should I Believe The Bible?
The Rosetta Stone

नेपोलियन के वैज्ञानिकों द्वारा मिस्र में 1799 में खोजा गया रोसेटा स्टोन (The Rosetta Stone) तीन भाषाओं में लिखा गया था: चित्रलिपि (Hieroglyphics), मिस्र की प्राचीन लिपि (Demotic), और यूनानी (Greek)। इसने चित्रलिपि के रहस्य को खोल दिया जिसने बाइबल की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में मदद की है।

1868 में दीबोन (Dibon), जॉर्डन (Jordan) में खोजे गए मोआबी पत्थर (The Moabite Stone) ने इस्राएल पर मोआबी के हमलों की पुष्टि की, जैसा कि 2 राजाओं 1 और 3 में दर्ज है।

1932-1938 में बेर्शेबा से 24 मील उत्तर में खोजे गए लाकीश पत्रों (The Lachish Letters) में 586 ईसा पूर्व में यरूशलेम पर नबूकदनेस्सर के हमले का वर्णन है। 

Dead Sea Scrolls क्या हैं? 

Dead sea Scrolls अर्थात मृत सागर चर्म प्राचीन पांडुलिपियां हैं, जो मृत सागर के उतर-पश्चिमी सागरीय तट के गुफाओं में पाया गया जो कि पृथ्वी का सबसे निचला भाग है। ये चर्मपत्र चूना पत्थर के चट्टानों तथा चिकनी मिट्टी की गुफाओं में पाए गए थे। ये गुफाएं कुमरान (Qumran) के निचले भूमितल के नदी घाटी में पाए गए हैं। इसमें 931 लेख का एक संग्रह पाया गया है। बाइबल के पुराने नियम की सबसे पुरानी प्रतिलिपि यहीं से प्राप्त हुई है। यहां से यहूदी संप्रदाय के लेख प्राप्त हुए हैं, जिन्हें इब्रानी, यूनानी और अरामी में लिखा गया था। इन लेखों के संग्रह में कुछ तो 250 ईस्वी पूर्व 68 ईस्वी के बीच लिखा गया है। ये लेख सन 68 ईस्वी से पहले यहूदिया के मरुस्थल की गुफाओं में छिपाए गए थे। 

Why Should I Believe The Bible?
Qumran cave 4, where 90% of the scrolls were found. Image by Heather Truett from Pixabay

1940 के दशक में Ta’amirah Bedouin जनजाति के चरवाहे यहूदिया के रेगिस्थान में अपने बकरियों के झुंड की देखभाल कर रहे थे। वहां गुफाओं में चरवाहों को ये हस्तलिपियां मिली। इन चरवाहों के नाम थे Jum’a Muhammed और Muhammed edh-Dhib. ये चरवाहे अपनी खोई हुई बकरी को ढूंढते ढूंढते यहां पहुंचे थे। उस चरवाहे ने बकरी को गुफा से बाहर निकालने के लिए एक पत्थर को गुफा में फेंक दिया तब उसने मिट्टी के बर्तन के टूटने की आवाज़ सुनी थी। इस प्रकार बाइबल के हस्तलिपियां हमें प्राप्त हो पाई हैं। और आज हमारे हाथ में परमेश्वर का जीवित वचन पहुंच पाया है। 

बाइबल की उपलब्ध पौराणिक हस्त लिपिओं की संख्या केवल नए नियम की 5300 ग्रीक हस्तलिपियां हैं। लैटिन की 10,000 हस्तलिपियां हैं। दूसरी भाषाओं की 9300 हस्तलिपियां है। कुल 24000 हस्तलिपियां हैं जिन्हें प्रथम रैंक दिया गया है। दूसरे स्थान पर आता है “होमेर की हस्तलिपियां” “इलियाद” जिसकी संसार में 643 हस्तलिपियां हैं।

पांडुलिपियां। (The Manuscripts)

प्राचीन काल के किसी भी साहित्य की तुलना में बाइबल की प्रामाणिकता के अधिक प्रमाण हैं। पाठ्य विश्लेषण, ऐतिहासिक जांच से शुरू होता है, नवीनतम दस्तावेजों से शुरू होता है और पीछे की ओर काम करता है। जैसे-जैसे साक्ष्य विकसित होते हैं, डेटा का मूल्यांकन अन्य स्रोतों से किया जाता है। फिर रिकॉर्ड की जानकारी की स्थिरता के लिए जाँच की जाती है, और दावों का विश्लेषण किया जाता है जैसे कि यह एक कानूनी मामला था। 

नया नियम पहली शताब्दी ईस्वी में लिखा गया था। अस्तित्व में कुछ 20,000 पांडुलिपियां हैं। हमारे पास सबसे पहले पाठ्य साक्ष्य मूल के 100 साल बाद कॉपी किए गए थे। कैसर के गैलिक युद्ध, पहली शताब्दी ईसा पूर्व में लिखे गए थे। वहाँ केवल 10 पांडुलिपियां अस्तित्व में हैं। हमारे पास सबसे पहले पाठ्य साक्ष्य मूल के 1,000 साल बाद कॉपी किए गए थे। अरस्तू का काव्य चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में लिखा गया था। वहाँ केवल 5 पांडुलिपियां अस्तित्व में हैं। हमारे पास सबसे पहला पाठ मूल के 1,400 साल बाद कॉपी किया गया था।

पुराने नियम को तुलनीय युग के किसी भी अन्य प्राचीन लेखन की तुलना में अधिक सटीक रूप से हमें प्राप्त हुआ है। किसी भी अन्य ऐतिहासिक रूप से विश्वसनीय प्राचीन दस्तावेज़ की तुलना में पुराने और नए नियम दोनों के लिए पाठ्य साक्ष्य अधिक है। प्राचीन काल के शास्त्री बहुत ही बुद्धिमान थे।

पूर्व-मसीही लेखन के उद्धरण लेख की पुष्टि करते हैं। नया नियम पुराने नियम को प्रामाणिक मानता है, पारंपरिक लेखकों की पुष्टि करता है, कम से कम 320 विभिन्न मार्ग से उद्धृत करता है, और पुराने नियम में उद्धृत अलौकिक घटनाओं की पुष्टि करता है। 

पुरातत्व उत्खनन।

बाइबल की प्रामाणिकता का प्रमाण पुरातात्विक खुदाई से भी मिलता है जो बाइबल में पाए गए लोगों और शहरों के नामों के अस्तित्व को साबित करता है। उदाहरण के लिए, पेट्रा शहर की खोज ने बाइबल के अभिलेख की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में मदद की।

इसके अलावा, बाइबल की कई भविष्यवाणियाँ पहले ही सच हो चुकी हैं। बाबुल (यशायाह 13:19-22), सोर (यहेजकेल 26:3-5), सीदोन (यहेजकेल 28:21-23), कुस्रू (एज्रा 4:3; 5:13-14; यशायाह 44:28; 45:1), मादी और फारसी (दानिय्येल 8:20-21), यूनान (दानिय्येल 8:20-21), और यीशु के जन्मस्थान बेतलेहेम (मीका 5:2) सभी भविष्यवाणी के अनुसार पूरी हो चुकी हैं। ये पूरी हुई भविष्यवाणियाँ बाइबल की विश्वसनीयता के लिए एक अत्यंत मजबूत तर्क हैं। वे संकेत करते हैं कि हम मसीह विरोधी और अन्य अंत-समय की भविष्यवाणियों से संबंधित भविष्यवाणियों पर भरोसा कर सकते हैं।

वर्ष 1812 में, स्विस खोजकर्ता जोहान बर्कहार्ट, एक अरबी शेख, ने खोए हुए शहर की खोज की। जब उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की, तो यह लगभग अविश्वसनीय लग रहा था कि ऐसी सुरम्य जगह यरूशलेम से सिर्फ 161 किलोमीटर दक्षिण में बिना जाने ही मौजूद हो सकती है। अस्थिर मध्य पूर्वी राजनीतिक स्थिति के कारण, पेट्रा की यात्रा लगभग असंभव हो गई थी, और हाल के वर्षों में ही यह प्राचीन शहर पर्यटकों के लिए आसानी से सुलभ हो गया है। ओबद्याह पेट्रा के ऊंचे स्थानों और उसके निवासियों के विश्वास का वर्णन करता है। हालाँकि, यिर्मयाह ने भविष्यवाणी की थी कि शहर अपनी शक्ति खो देगा और निर्जन हो जाएगा। (ओबद्याह 3-4; यिर्मयाह 49:16-18)

बाइबल के अलावा दूसरे 4 समकालीन लेखकों द्वारा प्रमाण।

  • जोसिफस (37 AD) जिसने यहूदी इतिहास को लिखा। उसने अपने लेखों में यीशु और उसके उपदेश और कई चमत्कारों का वर्णन किया।
  • इसुबियस (Ecclesiastical history, 3. 39AD) इसने मरकुस रचित सुसमाचार का हवाला दिया। 
  • पेपियास (C. 130 AD) इसने मत्ती रचित सुसमाचार का हवाला दिया।
  • इरेनियुस (C. 180 AD) इसने अपने लेखों में चारों सुसमाचार का हवाला दिया।

वैज्ञानिक सटीकता।

हालांकि यह सच है कि बाइबल मुख्य रूप से एक विज्ञान की किताब नहीं है, आपके मन की बात कहने के लिए तैयार की गई कोई पाठ्य पुस्तक नहीं है, बल्कि आपसे दिल की बात कहने के लिए एक प्रेम पत्र है। हमें यह याद रखना चाहिए कि उद्धार का परमेश्वर सृष्टि का परमेश्वर है… और जब बाइबल वैज्ञानिक मामलों पर बात करती है, तो वह पूरे अधिकार, निश्चितता और सटीकता से बोलती है। समय-समय पर आप आधुनिक विज्ञान से असहमत होने के बारे में सुनेंगे। ऐसा होने पर हमें क्या करना चाहिए? धैर्य रखें, और विज्ञान को पकड़ने का समय दें! विज्ञान को हमेशा बाइबल को पकड़ने की जरूरत है। आइए कुछ उदाहरणों पर गौर करें….

अय्यूब की पुस्तक बाइबल की पुरातन पुस्तकों में से एक है। इसे 3500 ईसवी पूर्व लिखा गया था। एक वैज्ञानिक हेनरी मोरिश ने लिखा “यह संदर्भों में आधुनिक नजरिया है।” इसमें पौराणिक मिथकों या त्रुटियों का समावेश नहीं है। अधिक महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इसमें अनेक प्राकृतिक घटनाओं का वर्णन है। जिनमें किसी प्रकार की वैज्ञानिक त्रुटियां नहीं है।” (From “The Remarkable Record of Job”) 

खगोल विज्ञान।

पृथ्वी के बारे में विचार। – आज हम मानते हैं कि पृथ्वी अंतरिक्ष में लटकी हुई है, और बिना किसी के सहारे लटकी हुई है। प्राचीन मिस्रवासी विश्वास करते थे और सिखाते थे कि पृथ्वी को 5 संगमरमर के खंभों द्वारा समर्थित किया गया था। यूनानी विश्वास के अनुसार पृथ्वी चपटी है और यह एटलस देवता के पीठ पर टिकी हुई है। हिंदू विश्वास के अनुसार हाथी की सूंड पर, कछुए की पीठ पर अथवा शेषनाग के फन पर टिकी है। क्या आपको खुशी नहीं है कि आपने इन मूर्खतापूर्ण बातों को बाइबल में नहीं पढ़ा?

मसीही विश्वास के अनुसार पृथ्वी बिना किसी आधार के टिकी हुई है। वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है। (अय्यूब 26:7) कुछ सौ साल पहले तक यह एक क्रांतिकारी विचार था। बिलदद को यह कैसे पता चला होगा कि पृथ्वी बिना किसी आधार के लटकी हुई है? वो इसलिए क्योंकि सभी शास्त्र के वचन प्रेरणा से दिए गए हैं!

1492 तक किसी को विश्वास नहीं था कि पृथ्वी गोल है। लेकिन 700 ईस्वी पूर्व यशायाह ने कहा कि परमेश्वर “पृथ्वी के घेरे पर विराजमान है।” यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमंडल पर विराजमान है, और पृथ्वी के रहने वाले टिड्डी के तुल्य हैं; जो आकाश को मलमल कि समान फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिए तंबू ताना जाता है। (यशायाह 40:22)

वायु के बारे में विचार। – वायु में भार होता है। जब उसने वायु का तौल ठहराया, और जल को नपुए में नापा। (अय्यूब 28:25) 17 वीं सदी में गैलीलियो ने खोज निकाला की वायु में भार होता है। आज के आधुनिक विज्ञान का एरोडायनमिक नियम इसी तथ्य पर आधारित है। वायु का भार संसार में जलवायु के संचालन प्रक्रिया के लिए अति आवश्यक है।

एरोडायनमिक के विज्ञान में वायु का बहाव और भार का अध्ययन किया जाता है। यही आज के अंतरिक्ष विज्ञान का आधार भी है। यहां तक कि वायु का भार समुद्री जल धाराओं और वाष्पीकरण की प्रक्रियाओं में गति प्रदान करता है।

सागर के अंदर सोते होते हैं। – क्या तू कभी समुद्र के सोतों तक पहुंचा है या गहरे सागर की थाह में कभी चला फिरा है? (अय्यूब 38:16) खारे समुद्र के तल में मीठे जल के अनगिनत सोते हैं इसे वैज्ञानिकों ने हाल ही में खोज निकाला।

सागर के अंदर जल मार्ग होते हैं। – यहोवा जो समुद्र में मार्ग और प्रचंड धारा के पथ बनाता है। (यशायाह 43:16) वैज्ञानिकों ने इसे 19 वीं सदी में जाना। (Maury, The Physical Geography of the sea,  6th ed, 1856, p.25). 

किस मार्ग से उजाला फैलाया जाता है जिससे पुरवाई पृथ्वी पर बहाई जाती है? (अय्यूब 38:24) आधुनिक विज्ञान ने इसे खोज निकाला कि जब सूर्य की गर्मी से पृथ्वी का धरातल गर्म हो जाता है तब गर्म हवा ऊपर को उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है इस प्रकार आबोहवा की प्रक्रिया चलती रहती है।

सूर्य और तारे। – 150 ई.पू. हिप्पार्कस (Hipparchus) नामक खगोलविद ने अपनी पेंसिल रखी और मुस्कुराया, “यह हो गया!” उसे विश्वास था कि उसने आकाश के सभी तारों को गिन लिया है। 1022! यह संख्या 250 वर्षों से विश्वविद्यालयों में उपयोग की जाने वाली संख्या थी। फिर टॉलेमी (Ptolemy) उसके साथ आया और हँसा, 1022, यह हास्यास्पद है, 1026 है! उसे 4 और मिले! और वह 1300 वर्षों तक विज्ञान था। तब गैलीलियो (Galileo) अपने आविष्कार के साथ आया, पहला कच्चा दूरबीन, उसने पहली बार इसके माध्यम से देखा, और हांफने लगा। अब हम जानते हैं कि प्रत्येक आकाशगंगा में अरबों-अरबों तारे हैं, जो असंख्य हैं! उनमें से किसी के भी पैदा होने से बहुत पहले बाइबल ने क्या कहा था? आकाश की सेना की गिनती और समुद्र की बालू के किनकों को गिन नहीं सकते हैं। (यिर्मयाह 33:22)

सूर्य और तारों के तेज में अंतर है। सूर्य का तेज और है चांद का तेज और है और तारागणों का तेज और है क्योंकि एक तारे से दूसरे तारे के तेज में अंतर है। (1 कुरिंथियों 15:41) सूर्य की रोशनी से वायु को गति मिलती है जबकि भोर के तारे एक संग आनंद से गाते थे। (अय्यूब 38:7) 20 वीं शताब्दी में विज्ञान को पता चला कि तारों से रेडियो सिग्नल मिल रहा है। 

जे वियर ने 1603 में तारों के तेज को नापने की विधि निकाली। आज कोई अंतरिक्ष विज्ञानी इंकार नहीं कर सकता कि तारों के आकार, रंग, रोशनी, घनत्व और ताप में अंतर है। सूर्य एक तारा है। यह पृथ्वी से आकार में 10 लाख गुना बड़ा है। आकाश में और भी तारे हैं जो उससे भी बड़े हैं।

आप सभी जानते हैं कि हमारे आकाशमंडल में अनगिनत तारागण हैं, जिनको कोई गिन नहीं सकता। उत्पत्ति में परमेश्वर ने अब्राहम को आकाश के गणों को गिनने के लिए कहा था जो कि नामुमकिन है। अब्राहम के वंश को ऐसी ही आशीष परमेश्वर ने दी। परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, तेरा वंश असंख्य होगा, (फिर एक दृष्टांत का इस्तेमाल किया) आकाश के सितारों की तरह। उसने उसको बाहर ले जाकर कहा आकाश की ओर दृष्टि करके तारागणों को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है? फिर उसने उससे कहा तेरा वंश ऐसा ही होगा। (उत्पत्ति 15:5)

औषधि। 

जैसा कि हाल ही में 1600 डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने अभी भी माना था कि मानव शरीर में बहुत अधिक रक्त होने के कारण कई बीमारियां होती हैं। लेकिन अब, विज्ञान जानता है, यह रक्त ही है जो बीमारियों से लड़ता है, पोषण लाता है, ऊतक की मरम्मत करता है, विकास को बढ़ावा देता है। यदि उन्होंने केवल लैव्यव्यवस्था पढ़ा होता तो शायद उन्हें पता चल पाता कि, “शरीर का जीवन लोहू में है।” (लैव्यव्यवस्था 17:11) 

19 वीं सदी के आरंभ तक डॉक्टर इसे अच्छी तरह नहीं जानते थे। अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति के इलाज के क्रम में उसके खून को निकाल दिया गया और उसकी मृत्यु हो गई।

प्लेग का इलाज़। – 14वीं शताब्दी – यूरोप में ब्लैक प्लेग ने आबादी को तबाह कर दिया, क्योंकि 4 में से 1 व्यक्ति की मृत्यु हो गई! प्लेग को नियंत्रण में लाने वाले वैज्ञानिक/डॉक्टर नहीं थे, बल्कि कलीसिया थी। कलीसिया ने उस स्थिति के लिए एक सिद्धांत लागू किया जो उस दिन तक अनसुना था, लेकिन जिसे हम आज हल्के में लेते हैं। जब तक उसमें व्याधि रहे, तब तक वह अशुद्ध रहेगा।” वह अशुद्ध है, और वह अकेला रहेगा; उसका निवास छावनी के बाहर होगा। (लैव्यव्यवस्था 13:46) मूसा के दिनों में लोग सूक्ष्म जीव विज्ञान के बारे में कुछ नहीं जानते थे। वे नहीं जानते थे कि रोगाणु या वायरस क्या होता है! लेकिन परमेश्वर ने उन्हें Quarantine का सिद्धांत दिया। (गिनती 5:4)

हाथ धोने के बारे में। – चिकित्सा क्षेत्र आज धुलना जानता है, लेकिन केवल इसलिए कि विज्ञान ने इस क्षेत्र में बाइबल को पकड़ लिया है। हज़ारों साल पहले, मूसा ने गिनती 19 में कहा था।

यहां सिद्धांत Quarantine, पानी से धोना, कपड़े बदलना, बैक्टीरिया के मरने का समय अंतराल इत्यादि मूसा इन बातों को कैसे जानता था? क्योंकि “सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं।” अब तक हम चिकित्सा क्षेत्र को देख रहे हैं, और अब तक हमने जितनी भी आयतें देखी हैं, वे पंचग्रंथ से हैं, जो मूसा द्वारा लिखी गई बाइबल की पहली 5 पुस्तकें हैं। मूसा कहाँ का था? या उसकी शिक्षा कहां पर हुई? मुझे मालूम है कि आपको इसका उत्तर पता है कि उसकी शिक्षा मिस्र में ही हुई! 

उन दिनों मिस्र चिकित्सा व्यापार में अग्रणी था। प्राचीन मिस्रवासियों को चिकित्सा के क्षेत्र में प्रतिभाशाली माना जाता था। पुरातत्वविदों को 1855 में एक चिकित्सा पुस्तक मिली, “पैपिरस एबर्स” (Papyrus Ebers) एक व्यापक पुस्तक जिसमें मूसा के रहने के समय की लगभग सभी चिकित्सीय जानकारी थी। इसमें निहित कुछ जानकारी केवल विचित्र थी। जैसे कि बालों को सफेद होने से रोकने के लिए, आप तेल में उबली हुई काली बिल्ली के खून से, या सांप की चर्बी से अपने सिर का अभिषेक करें। गंजापन के लिए “साँप की 6 चर्बी का मिश्रण लगाकर उसे दृढ़ करना, और गदहे के दाँत से उसका अभिषेक करना, जिसे शहद में कुचला गया हो।” एक और इलाज: ख़ुरमा (Persimmon) जिसको हम जापानी फल कहते हैं, के रस में सिर भिगोएँ। अन्य उपायों में गधे का गोबर, छिपकली का खून, सूअर के दांत, सड़ा हुआ मांस, सुअर के कान से नमी, मक्खी का उत्सर्जन शामिल हैं।

यह शानदार दवाइयाँ प्राचीन मिस्रवासियों से है, जिनके स्कूलों में मूसा की शिक्षा हुई थी। मुझे खुशी है कि मूसा के लेखन में हमें ये निर्देश नहीं मिले! मुझे खुशी है कि जब आप मूसा द्वारा लिखी गई आहार संहिता को पढ़ते हैं, तो आप इसमें उच्चतम मानकों को पाते हैं, और वो भी बिना चिकित्सीय विरोधाभास के…क्यों? क्योंकि सभी शास्त्र प्रेरणा से दिए गए हैं!

पूरी हुई भविष्यवाणियां भी बाइबल की सटीकता के बारे में बयां करती हैं। 

बाइबल पुस्तकों में बेमिसाल है। इसमें कई घटनाओं के होने से पहले ही उनके बारे में पर्याप्त विवरण के साथ भविष्यवाणी किया गया। बाइबल में करीब 2500 भविष्यवाणियां है जिनमें से लगभग 2000 से अधिक पूरी हो चुकी हैं और बाकी 500 भविष्यवाणियां पूरी होना बाकी हैं।

बाइबल की प्रेरणा का सबसे मजबूत प्रमाणों में से पूरी हुई भविष्यवाणियों की घटनाएं हैं। इस संबंध में मानव जाति की धार्मिक पुस्तकों में बाइबिल अनिवार्य रूप से अद्वितीय है। इतिहास में किसी भी पुस्तक ने बिना गलत साबित हुए, भविष्य की भविष्यवाणी करने की हिम्मत नहीं की है, जो कि बाइबल के पास है। इस समय के लिए, आइए इसे केवल उन भविष्यवाणियों तक सीमित करें जो 2000 साल पहले मसीह के आगमन से संबंधित थीं। 

300 से अधिक प्रत्यक्ष भविष्यवाणियां, जैसे: 

  • यशायाह 7:14 वह एक कुंवारी से पैदा होगा। लूका 1:27-38 में ऐसा हुआ!
  • मीका 5:2 बेतलेहेम में पैदा हुआ। लूका 2:4 में ऐसा हुआ!
  • उत्पति 49:10 यहूदा के गोत्र से आएगा। मत्ती 1:1-16 में ऐसा हुआ!
  • भजन संहिता 78:2 दृष्टान्तों में बोले। मती 13:34 में ऐसा हुआ!
  • जकर्याह 9:9 गधे के बच्चे पर सवारी। मती 21:1-11 में ऐसा हुआ!
  • यशायाह 61:1 खेदित मन के लोगों को शांति देगा। लूका 4:18 में ऐसा हुआ!
  • यशायाह 53:3 अपनों के द्वारा द्वारा अस्वीकृत किया जाएगा। यूहन्ना 1:11, मरकुस 6:1-6 में ऐसा हुआ!
  • यशायाह 53:7 अभियुक्तों के सामने चुप खड़े रहेगा। मरकुस 15:5 में हुआ!
  • भजन संहिता 22:18 उसके लबादे के लिए चिट्ठी डाली। यूहन्ना 19:23-24 में ऐसा हुआ!
  • भजन संहिता 22 सूली पर चढ़ने से सैकड़ों साल पहले विचार किया गया था।
  • भजन संहिता 22:1 “हे परमेश्वर, मुझे क्यों छोड़ दिया?” मती 27:46 में ऐसा हुआ!

उस शहर के बारे पहले ही बता दिया गया था जिसमें यीशु का जन्म होना था। (मीका 5:2) उसका कुंवारी से पैदा होने के बारे में भी पहले ही बता दिया गया था। (यशायाह 7:14) उसके चमत्कारों के बारे में भी बता दिया गया था। (यशायाह 35:5) यीशु का अपने ही लोगों के द्वारा बहिष्कार किया जाने के बारे में भी पहले ही बता दिया गया था। (यशायाह 53:3-5) क्रूस पर उसकी मृत्यु। (भजन संहिता 22:16-17) उसके वस्त्रों पर चिट्ठियां डाली जाएंगी। (भजन 22:18) उसकी मृत्यु कुकर्मियों के साथ होगी और कब्र धनवानों के साथ। (यशायाह 53:9) अधोलोक उसको अपने वश में ना रख सकेगा। (भजन 16:10) आइए कुछ दूसरी भविष्यवाणियों पर भी गौर करें।

यहेजकेल 26:2, 4, 12 में सोर के नगर के बारे में भविष्यवाणी पाई जाती है जो कि 587 ईस्वी पूर्व की गई थी। इसमें बताया गया था कि सोर नगर के पत्थर, काठ और धूलि जल में फेंक दिए जाएंगे। इसको नबूकदनेस्सर ने 573 ईस्वी पूर्व में पराजित किया और 333-332 ईस्वी में सिकंदर ने उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया था। आज वह मछुआरों की बस्ती है। 

एदोम के विनाश की भविष्यवाणी (यिर्मयाह 49:7, 16) – एदोम की राजधानी पेट्रा को चट्टानों को काटकर अति सुरक्षित बनाया गया था। पर आज उसका राज्य समाप्त हो गया अब वह जॉर्डन का एक अंग है। एदोम बहुत उपजाऊ था, और सींची हुई भूमि थी। यिर्मयाह ने भविष्यवाणी किया कि वह उजाड़, निर्जन और बंजर हो जाएगा। (यिर्मयाह 49:15-20, यहेजकेल 25:12-14) 582 ईस्वी पूर्व यरूशलेम को आग के हवाले करने के चार साल बाद राजा नबूकदनेस्सर ने एदोम पर चढ़ाई करके अपने कब्जे में लेकर उन पर बहुत जुल्म किया। जिसके फलस्वरूप लोग तितर-बितर हो गए। 126 ईस्वी पूर्व मक्काबी शासक जॉन हिरकनस (John Hyrcanus) ने उन्हें यहूदिया में बसाया। 63 ईस्वी पूर्व जब रोमी साम्राज्य ने यहूदा पर शासन किया तब एक एदोमी हेरोदेस को यहूदा का शासक ठहराया। परंतु 70 ईस्वी में यरूशलेम के विनाश के बाद ये जाति इतिहास से पूर्णतया गायब हो गई। 

मिस्र दुबारा दूसरे देशों पर शासन नहीं कर पाएगा। (यहेजकेल 29:15) – यहेजकेल के समय तक मिस्र विश्वशक्ति के रूप में था और इजराइल समेत अन्य देशों पर शासन करता रहा। लेकिन उसके बाद 2500 से अधिक वर्षों तक दूसरे उस पर शासन करते रहे हैं। अभी स्वतंत्र हो गया। 1948, 1967 और 1973 में उसने अपने से 10 गुना छोटे इजराएल पर कब्जा करने का प्रयास किया पर असफल रहा। अभी प्रभावशाली जरूर है पर यहेजकेल के समय के बाद आज तक किसी दूसरे देश पर शासन नहीं कर सका है।

बेबीलोन के फाटक कुस्रू की चढ़ाई के लिए खोल दिए जाएंगे। (यशायाह 45:1, यिर्मयाह 50:1-3) – बेबीलोन की सुरक्षा और घेराबंदी बहुत बढ़िया थी। 195 वर्ग मील पर बसा, 90 फीट मोटी और 330 फीट ऊंची दोहरी दीवार, 250 पहरे की चौकियां। कुस्रू की सेना फरात नदी जो शहर के बीच से बहती थी उसके अंदर से तैर कर आए और फाटक खोल दिए और बेबीलोन पर कब्जा कर दिया। 

1800 ईस्वी में पुरातत्वविदों की खोजों में से नीनवे नगर के खंडहर में राख की एक मोटी परत पाई गई। यह अर्कोपोलिस के अनेक क्षेत्रों में बिखरा पड़ा है। Encyclopedia Britannica के अनुसार नीनवे को बेबीलोन सैथीयन मादियों के द्वारा 612 ईस्वी पूर्व ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। 612 ईस्वी पूर्व के बाद अब यह एक महत्वहीन शहर मात्र रह गया है। 

यहोशू ने यरीहो के विषय में भविष्यवाणी किया कि जब भी कोई व्यक्ति इसको फिर से बसाएगा तो नीव के समय उसका बड़ा बेटा मरेगा और जब काम पूरा होगा तो उसका छोटा बेटा मरेगा। इसके 500 साल बाद हीएल नामक व्यक्ति ने उसे बसाया और उसके साथ वैसा ही हुआ जैसा यहोशू ने कहा था। (1 राजा 16:34)

यशायाह नबी ने पहले से बता दिया कि बेबीलोन को जीतने वाला राजा कुस्रू होगा। हालांकि यह हर तरह से असंभव जान पड़ता था कि बेबीलोन अन्य देशों के साथ धराशाई हो जाएगा। यशायाह ने यह भी कहा था कि राजा कुस्रू ही यहूदियों को गुलामी से जाने देगा, वह भी छुड़ौती की कीमत लिए बिना। (यशायाह 44:28, 45:1, 45:13) यशायाह नबी ने यह बातें राजा कुस्रू के जन्म से 150 वर्ष पहले और इस काम को संपन्न करने से 180 वर्ष पहले और इजराइलियों की गुलामी में जाने से 80 वर्ष पहले कही थी। 

यहजीएल ने भविष्यवाणी की थी कि राजा यहोशापात और थोड़े से लोगों का दल दुश्मनों की विशाल शूरवीर सेना को पराजित करेगा और ऐसा ही हुआ। (2 इतिहास 20:1-33) 

यहूदी राष्ट्र के बारे में भविष्यवाणी – फिर यदि तुम इसके उपरांत भी मेरी ना सुनोगे और मेरे विरुद्ध चलते ही रहोगे तो मैं अपने न्याय में तुम्हारे विरूद्ध चलूंगा और तुम्हारे पापों के कारण तुमको 7 गुनी ताड़ना भी दूंगा। (लैव्यव्यवस्था 26:27-28) 

और मैं तुम्हारे देश को जाति जाति के बीच तितर-बितर करूंगा और तुम्हारे पीछे-पीछे तलवार खींचे रहूंगा और तुम्हारा देश सूना हो जाएगा और तुम्हारे नगर उजाड़ हो जाएंगे। (लैव्यव्यवस्था 26:33) 

परमेश्वर की आज्ञा मानने का परिणामपरमेश्वर को त्यागने का परिणाम
प्रतिज्ञा का देशउजाड़ हो जाएगा
बड़ी जाति बनाएगातितर बितर हो जाएंगे
आशीष मिलेगीतलवार या मृत्यु के कौर हो जाएंगे

यरूशलेम को 46 बार पराजित किया गया। 13 बार आंशिक रूप से नाश किया गया और 17 बार पूरी तरह से नष्ट किया गया। 25 बार सत्ता बदली गई। वे तेरे पुत्र पुत्रियों को छीन ले जाएंगे और तेरा जो भी बचा रहेगा वह आग से भस्म हो जाएगा। (यहेजकेल 23:25) 

इस कारण तुझको भूखा, प्यासा, नंगा और सब पदार्थों से रहित होकर अपने उन शत्रुओं की सेवा करनी पड़ेगी। जिन्हें यहोवा तेरे विरुद्ध भेजेगा और जब तक तू नष्ट ना हो जाए तब तक वह तेरी गर्दन पर लोहे का जुआ डाल रखेगा। (व्यवस्थाविवरण 28:48) 

और मैं तुझ पर जलूंगा जिससे वे जलजलाहट के साथ तुझसे बर्ताव करेंगे वे तेरी नाक और कान काट लेंगे और तेरा जो भी बचा रहेगा और तलवार से मारा जाएगा। (यहेजकेल 23:25) वे तेरे वस्त्र भी उतारकर तेरे सुंदर सुंदर गहने छीन ले जाएंगे। (यहेजकेल 23:26) 

और तेरी लोथ आकाश के भांति भांति के पक्षियों और धरती के पशुओं का आहार होंगी और उनका कोई हांकने वाला ना होगा। (व्यवस्थाविवरण 28:26) तेरी बेटी बेटियां दूसरे देश के लोगों के हाथ लग जाएंगे और उनके लिए चाव से देखते देखते तेरी आंखें रह जाएंगी और तेरा कुछ बस ना चलेगा। तेरे बेटे बेटियां तो उत्पन्न होंगे, परंतु तेरे रहेंगे नहीं क्योंकि वे बंधुआई में चले जाएंगे। (व्यवस्थाविवरण 28:32-41) फिर हम इजराएल की फिर से अस्तित्व में आने की भविष्यवाणियाँ भी पाते हैं।

यहोवा की यह वाणी है ऐसे दिन आते हैं कि मैं अपनी इजराइली और यहूदी प्रजा को बंधुआई से लौटा लाऊंगा और जो देश मैंने उनकी पितरों को दिया था उसमें उन्हें फिर ले आऊंगा और फिर उसके अधिकारी होंगे। यहोवा का यही वचन है। (यिर्मयाह 30:3) मत डर क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा और पश्चिम से भी इकट्ठा करूंगा। मैं उतर से कहूंगा दे दे और दक्किन से कि रोक मत रख मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ। (यशायाह 43:5, 6) 

14 मई 1948 को वह दिन आया जब इजरायल एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया। और जो लोग तितर बितर हुए थे अपने देश वापस लौटने लगे। ये कौन हैं जो बादल की नाई और दरबों की ओर उड़ते हुए कबूतरों की नाई चले आते हैं। (यशायाह 60:8) ये भविष्यवाणी उस वक्त की थी जिस वक्त हवाई जहाज के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। तब तेरा परमेश्वर यहोवा अपने वचन के अनुसार तुझे आशीष देगा, परंतु तुझे उधार लेना न पड़ेगा और तू बहुत जातियों पर प्रभुता करेगा, परंतु वे तेरे ऊपर प्रभुता न करने पाएंगी। (व्यवस्थाविवरण 15:6)

इजराइल की स्थापना के दूसरे दिन ही अरब देशों ने युद्ध की घोषणा की पर इजराएल अब तक एक भी युद्ध नहीं हारा। तुममें से एक मनुष्य हज़ार मनुष्यों को भगाएगा क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा अपने वचन के अनुसार तुम्हारी ओर से लड़ता है। (यहोशू 23:10)

यरूशलेम सींची जाएगी। (यशायाह 51:3) परंतु हे इजरायल के पहाड़ों तुम पर डालियां पनपेगी और उनके फल मेरी प्रजा इजरायल के लिए लगेंगे क्योंकि उसका लौट आना निकट है। (यहेजकेल 36:8) और देखो मैं तुम्हारे पक्ष में हूं और तुम्हारी ओर कृपादृष्टि करूंगा और तुम जोते बोए जाओगे। (यहेजकेल 36:9) 

तुम्हारा देश जो सब आने जाने वालों के सामने उजाड़ है, वह उजाड़ होने के बदले जोता बोया जाएगा। (यहेजकेल 36:34) और लोग कहा करेंगे, यह देश जो उजाड़ हो गया था सो अदन की बारी सा हो गया और जो नगर खंडहर और उजाड़ हो गए और ढाए गए थे सो गढ़वाले हुए और बसाए गए हैं। (यहेजकेल 36:35) 

इतिहास का चमत्कार देखिए जो देश उजाड़ हो गया था वह हरा भरा और उपजाऊ बन गया। तितर बितर हुए लोग शक्तिशाली बन गए। नरसंहार झेले लोग समृद्धशाली हो गए। तब जो जातियाँ तुम्हारे आस पास बची रहेंगी, वे जान लेंगी कि मुझ यहोवा ने ढाए हुए को फिर बनाया, और उजाड़ में पेड़ रोपे गए हैं, मुझ यहोवा ने ऐसा कहा, और ऐसा ही करूँगा। (यहेजकेल 36:36)

हमारे आज का जगत के बारे में भी कई बातें कहीं गई हैं जो आज पूरी हो रही हैं। (मती 24 अध्याय) इसके अलावा और भी कई भविष्यवाणियाँ हैं जो पूरी हो चुकी हैं। इस लेख में उन सबका ज़िक्र करना संभव नहीं हैं। अब हम फिर से कह सकते हैं कि बाइबल पुस्तकों में बेमिसाल है। इसमें कई घटनाओं के होने से पहले ही उनके बारे में प्राप्त विवरण के साथ भविष्यवाणी किया गया।

अद्भुत सुरक्षा के कारण।

हमें बाइबल में इसलिए भी विश्वास करना चाहिए क्योंकि बाइबल एकमात्र ऐसी पुस्तक है जिसको अनेक प्रभावशाली लोगों ने चुनौती दिया, अपमान किया, निंदा किया और नष्ट करने का प्रयास किया किंतु यह अद्भुत तरीके से अब तक सुरक्षित है। बाइबल की उत्पत्ति कम आश्चर्यजनक नहीं है, यह इसका संरक्षण है। “हमेशा के लिए, हे परमेश्वर, तेरा वचन स्वर्ग में बसा हुआ है।” “बाइबल, महीने की किताब नहीं है, यह युगों की किताब है!” बाइबल पर सबसे अधिक घृणास्पद, किसी भी पुस्तक पर अधिक आक्रमण नहीं किए गए हैं। परमेश्वर के वचन की तरह किसी भी पुस्तक को कभी भी तिरस्कृत और अस्वीकार नहीं किया गया है। इसे जला दिया गया है, उपहास किया गया है, गैरकानूनी घोषित किया गया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, जितना अधिक हमला किया जाता है, उतना ही यह गुणा करता है!

“बाइबल, महीने की किताब नहीं है, यह युगों की किताब है!”

303 ईसवी में रोमन सम्राट डाईक्लेशियन ने एक अध्यादेश जारी किया कि बाइबल की हर प्रति को इकट्ठा किया जाए और जला दिया जाए वहां उसने एक स्मारक बनवाया और लिखा…. “The Name Christian Is Extinguished.” अर्थात मसीही नाम बुझ गया है। 20 वर्षों पश्चात 323 ईसवी में राजा कन्टसटाईन आया और सरकारी खर्च से बाइबल की प्रतियां बनवाई और अपने लिए 50 प्रतियां रख ली।

18 वीं सदी का एक प्रसिद्ध फ्रांसिसी नास्तिक लेखक वोल्टेयर (Voltaire) ने कहा – “मसीहियत को 12 लोगों ने लिखा और ऊंचा उठाया, मैं दिखाता हूं किस प्रकार एक व्यक्ति की लेखनी उसे धराशाई कर सकती है।” उसके पश्चात उसने अपनी कलम उठाई और परमेश्वर के विरुद्ध लिखना आरंभ किया। किंतु उसकी मृत्यु पश्चात उसका वही कमरा बाइबल का गोदाम बना। जेनेवा में उसी के प्रेस में बाइबल छापा जाने लगा और उसके घर को जेनेवा बाइबल सोसायटी ने बाइबल वितरण का केंद्र बनाया। 

वोल्टेयर ने चुनौती दी थी – “सौ वर्षों के अंदर बाइबल और मसीहियत अस्तित्व विहीन हो जाएंगे और इतिहास में चले जाएंगे।” 1778 ईस्वी में वोल्टेयर खुद अस्तित्व विहीन हो गया लेकिन बाइबल का अस्तित्व अब तक बना हुआ है। वोल्टेयर की पुस्तक केवल अंग्रेजी संस्करण तक ही सीमित रही पर बाइबल की मांग निरंतर बढ़ती रही है। मरने से पहले वोल्टेयर ने ये भी कहा था – “काश मैं पैदा न हुआ होता!” 

एक अमेरिकी नास्तिक इगरसोल ने एक बार बाइबल को हाथ में लेकर कहा “पंद्रह वर्षों के अंदर में मैं इस पुस्तक को मुर्दाघर में पहुंचा दूंगा।” पंद्रह वर्षों में वो बाइबल को तो मुर्दाघर नहीं पहुंचा पाया पर खुद जरूर मुर्दाघर पहुंच गया। 

जरा सोचिए – एक व्यक्ति किताब लिखता है और कुछ ही दिनों में बेस्ट सेलर बन जाता है। उसकी हजारों प्रतियां बिक जाती हैं। लोग कुछ समय बाद उसकी जगह दूसरी पुस्तक ले लेते हैं और उसे भूल जाते हैं। लेकिन बाइबल हमेशा से दुनियां की सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक है। दुनियां में प्रतिवर्ष बाइबल की 24, 000, 000 प्रतियां बिकती हैं, और प्रतिदिन 80, 000 प्रतियां बिकती हैं।

सर विलियम रामसे एक अंग्रेज स्कॉलर इस उद्देश्य से एशिया माइनर चले गए कि साबित करे कि बाइबल ऐतिहासिक रूप से त्रुटिपूर्ण है। सारे खोजों और सूचनाओं के अध्ययन के बाद उन्होंने पाया कि बाइबल सही है, और बाद में वे बाइबल के स्कॉलर बनें। 

20 वीं सदी में नाज़ियों ने बाइबल से संपूर्ण पुराने नियम को हटा दिया और बाकी बचे हुए भाग को नाज़ी विचारधारा के अनुरूप होने योग्य तैयार किया। 1930 ईस्वी में हिटलर ने चर्च जाकर राष्ट्रीयकरण कराया। जिसने भी इसको स्वीकार नहीं किया उन सबको अरेस्ट किया गया और बाइबलों को जला डाला। नाज़ियों का सफाया हो गया पर बाइबल अब तक उपलब्ध है। 

20 वीं सदी मैं विश्व में कम्युनिज्म तानाशाही के उदय के साथ रूस से लेकर चीन और अन्य देशों तक उनका एक प्राथमिक उद्देश्य था – “बाइबल और मसीही विश्वास को समाप्त किया जाए क्योंकि उनका कहना था कि बाइबल लोगों को अफीम के नशे की तरह ग्रसित करता है।” 1980 के दशक में सोवियत रूस के विघटन के साथ कम्युनिज्म बिखर गया जबकि बाइबल पहले से भी अधिक दृढ़ता से बनी हुई है। 

Authenticity Of The Bible
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150 ईस्वी में लूसिन नामक एक ग्रीक लेखक ने बाइबल का उपहास करने के लिए दो पुस्तकें लिखीं और उनका नाम रखा – “परमेश्वर और मुर्दे के बीच वार्तालाप” आज उसकी पुस्तकों का अता पता नहीं है पर अब तक बाइबल सब जगह उपलब्ध है। 

300 ईस्वी में एक ग्रीक लेखक पोरफेरी ने बाइबल को झूठा साबित करने के लिए पंद्रह पुस्तकें लिखीं और इंतजार करता रहा कि बाइबल का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। पर बाइबल का अस्तित्व तो अब तक बना है पर लगता है कि पोरफेरी और उसकी पुस्तकों ने हार मान ली थी। 

1150-1844 ईस्वी बाइबल के लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण समय था, जब रोम के पोप संसार में अपनी हुकूमत चलाते थे। पोप इनोसेंट तृतीय ने 1199 ईस्वी में फ्रांसीसी बाइबल को जला डाला और मना किया कि और बाइबल छापी ना जाए। पोप ग्रेगोरी नवम् ने 1234 ईस्वी में बाइबलों को जमा करके जला दिया था। जन साधारण की भाषा में अनुवाद करने के कारण जॉन विक्लिफ को 1383 ईस्वी में पाखंडी घोषित किया गया। 

पोप फर्डिनन्ड द्वितीय के आदेशानुसार 8 अगस्त 1600 ईस्वी में 10, 000 बाइबल जलाए गए। पोप क्लेमेंट द्वितीय ने 1713 ईस्वी में बाइबल के अध्ययन में पाबंदी लगाई। 1844 ईस्वी में पोप ग्रेगोरी 16th ने ऐलान किया कि जो बाइबल सोसायटी का पक्ष लेते हैं वे परमेश्वर और कलीसिया के विरुद्ध घोर अपराध करते हैं। मज़े की बात तो यह है कि 1939 ईस्वी तक बाइबल का अनुवाद 1000 भाषाओं में हो चुका था। 

जॉन कमिंग्स (John Cummings) ने कहा,

“कैसर का साम्राज्य चला गया है, लेकिन परमेश्वर का वचन अभी भी जीवित है, रोम की सेनाएं धूल में ढल रही हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन अभी भी जीवित है, नेपोलियन ने यूरोप पर जो हिमस्खलन किया था, वह पिघल गया है, लेकिन परमेश्वर का वचन अभी भी जीवित है, फिरौन का गर्व गिर गया है, लेकिन परमेश्वर का वचन अभी भी जीवित है। परंपरा ने इसके लिए एक कब्र खोदी है। बहुत से यहूदा ने एक चुम्बन से उसके साथ विश्वासघात किया है। कई देमास ने इसे छोड़ दिया है, लेकिन बाइबल अभी भी जीवित है।” – John Cummings

बाइबल हर समय प्रासंगिक रही है। 

बाइबल के बारे में यह भी परम सत्य है कि बाइबल सर्वदा प्रासंगिक है। यह हर उम्र के लोगों के अनुरूप है। फिर चाहे वे कम पढ़े लिखे हो या ज्यादा पढ़े लिखे। बाइबल हर जाति, हर संस्कृति के अनुकूल है। बाइबल जीवनों को परिवर्तित करता है। बाइबल मानसिक बीमारियों को चंगाई देती है। बाइबल एक जीवित पुस्तक है। बाइबल परमेश्वर का जीवित वचन है। बाइबल चुनाव करने में मार्गदर्शन करता है। बाइबल टूटे वैवाहिक संबंधों को जोड़ता है। बाइबल जीवन में जीने का उद्देश्य देता है। बाइबल बुरी लतों को छोड़ने में सहायता करता है। बाइबल डर भय से मुक्त करता है। बाइबल शत प्रतिशत सत्य है और शत प्रतिशत विश्वसनीय है। 

बाइबल की तरह कोई किताब प्रसारित नहीं की गई है। अब तक सबसे अधिक बिकने वाली। कई लोगों ने परमेश्वर के वचन को प्रसारित करने के लिए अपनी जान दी है। इस कार्य में बाइबल सोसायटी और गिदोन जैसे कई संगठन परमेश्वर के वचन को हर जन तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं। गिदोन ऐसा करने वाला एक संगठन हैं, और हर साल वे दुनियां भर में 80 मिलियन से अधिक बाइबल वितरित कर चुके हैं… और कई ऐसे परमेश्वर के जन हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं, क्योंकि वे हर जगह परमेश्वर के वचन को पहुंचाना चाहते हैं। 

जॉन वाईक्लिफ (John Wycliffe) ने पोप की इच्छा के विरुद्ध, लैटिन से अंग्रेजी में बाइबल का अनुवाद करने के लिए अपना जीवन दिया। उनकी मृत्यु के बाद, कलीसिया ने वास्तव में उनकी हड्डियों को खोदा और उन्हें जला दिया, और राख को टेम्स नदी (Thames River) में फेंक दिया। नदी उसकी राख को समुद्र तक ले गई, और समुद्र की धाराएं उन्हें दुनियां भर में फैला गईं, और हर जगह जहां लहरें किनारे को छूती हैं, परमेश्वर का वचन वितरित किया गया है।

आज जो बाइबल आपके साथ में है ये कोई साधारण पुस्तक नहीं है। बल्कि जीवन परिवर्तित करने वाली और आपके रिश्ते को परमेश्वर के साथ गहन बनाने के लिए ये परमेश्वर का प्रेमपत्र है। आज बोझ से दबे हुए विश्राम पाते हैं, निराश लोगों को आशा मिलती है। लक्ष्यहीनों को जीने का मकसद मिलता है। अंधकार में पड़े हुओं को ज्योति और खोये हुए लोगों को उद्धार मिलता है। एकाकी जीवन बिताने वाले को दोस्त मिलता है। कमजोरों को ताकत मिलती है, बुरी लतों से जूझने वालों को छुटकारा मिलता है और क्या क्या कहूँ मेरे पास परमेश्वर के जीवित वचन की प्रशंसा में शब्द कम हैं। 

हम बाइबल पर इसलिए विश्वास करते हैं क्योंकि यह जीवित परमेश्वर का जीवित वचन होने का दावा करता है। इसकी पूर्ण हुई भविष्यवाणियां, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक प्रमाण, इसके अनुवाद में सटीकता, अद्भुत रूप से सुरक्षित, वितरण, सर्वदा प्रासंगिक और जीवनों को बदलने की सामर्थ रखता है। आज हमारे जीवन में बाइबल की सत्यता (Authenticity of the Bible) के इतने साक्ष्य हैं कि यहाँ पर साझा करना मुश्किल होगा। आशा है कि ये जानकारियां आपकी आत्मिक उन्नति में मदद करेंगी और आपको साहस के साथ परमेश्वर का एक गवाह बनने में मदद करेंगी।

शालोम

परमेश्वर ने हमें बाइबल इसलिए नहीं दी है कि हम इसके विशेषज्ञ बनें पर इसलिए दी है ताकि इसके द्वारा हम परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करें।  

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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