Sword Method | The Effective and Easiest way to study the Bible | तलवार विधि से बाइबल अध्ययन करना सीखें

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Sword Method (The Effective and Easiest way to study the Bible) बहुत ही आसान, प्रभावी और प्रसिद्ध Bible Study करने का एक तरीका है। जहां काफी सारे मसीही लोग इस विधि को बाइबल अध्ययन करते वक़्त इस्तेमाल करते हैं वहीं कई लोग इस विधि को नहीं जानते हैं।

जब भी हम Bible Study करते हैं तो लागूकरण बहुत महत्व रखता है बिना लागूकरण के बाइबल अध्ययन निर्लाभ है क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को यह कहा था कि जो आज्ञाएं मैंने तुम्हें दी हैं उन्हें मानना सिखाओ। (मती 28:20) ध्यान रहे, मानना सिखाना अर्थात लागूकरण अत्यंत आवश्यक है।

बाइबल अध्ययन के बहुत से तरीके हैं पर आज हम SWORD Method (The Effective and Easiest way to study the Bible) से अध्ययन करना सीखेंगे। जो कि एक बाइबल अध्ययन करने का प्रभावशाली तरीका है। याद रखें Bible Study का कोई भी तरीका हो उसमें लागूकरण जरूर होना चाहिए।

मसीही जीवन के शुरुवात में Sword Method से बाइबल अध्ययन करना बहुत लाभदायक है। यह विधि सिर्फ एक नए विश्वासी के लिए ही नहीं बल्कि एक परिपक्व विश्वासी के लिए भी लाभदायक सिद्ध हो सकती है।

हर एक मसीही इस बात को जानता है कि परमेश्वर का वचन हर एक दोधारी तलवार से भी चोखा है, जो कि जीवित व प्रबल वचन है और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। (इब्रानियों 4:12) ये बोलने वाले और सुनने वाले दोनों को प्रभावित करता है, और दोनों के जीवन में लागू होता है।

जिस प्रकार तलवार के चार दिशाएं होती हैं उसी प्रकार जब हम Bible Study करते हैं तो हम भी अपने आप से चार सवाल पूछते हैं। ध्यान रहे, ये तलवार दोधारी है जो कि दोनों तरफ से काटती है।

Sword Method: The Effective and Easiest way to study the Bible

ऊपर दिए गए चित्र को देखिए और चार प्रश्न याद कर लें ताकि जब भी आप बाइबल का कोई भाग या कहानी अध्ययन करें तो आप बारी-बारी से इन चार सवालों को पूछें।

1) इस कहानी या भाग में हम परमेश्वर के बारे में क्या सीखते हैं?

बहुत से लोग परमेश्वर के बारे में जब बात करते हैं तो उसे ऊपरवाला कह कर भी संबोधित करते हैं। आपको शायद मालूम ही होगा कि दोधारी तलवार का ऊपरी हिस्सा भी काफी पैना होता है। तभी शायद यीशु ने पौलुस को कहा होगा कि पैने पर लात मारना तेरे लिए ठीक नहीं। (प्रेरितों 26:14)

हमें सर्वप्रथम परमेश्वर से ही सीखना चाहिए क्योंकि वो उत्तम शिक्षक है। (अय्यूब 35:11, 36:22) यीशु ने भी कहा कि मुझसे सीखो क्योंकि मैं मन में दीन हूं। (मती 11:29)

जब भी हम कोई भाग अध्ययन करेंगे तो हो सकता है कि उस भाग में यहोवा, परमेश्वर, यीशु और पवित्र आत्मा लिखा होगा। जो भी उस भाग में प्रभु का चरित्र बताया होगा उस को नोट करें और सीखें उसके चरित्र से, उसके स्वभाव से।

यह भी ध्यान रखें कि जब किसी एक भाग में इनका जिक्र ना हो तो जबरदस्ती इस पहले सवाल का जवाब ना लिखें। और यही बात आगे आने वाले सवालों के लिए भी लागू होती है। चलिए दूसरे सवाल की ओर चलते हैं।

2) इस कहानी या भाग में से मनुष्य के बारे में क्या सीख सकते हैं?

तलवार का निचला हिस्सा मनुष्य की ओर इशारा करता है। हो सकता है कि जिस भाग को हम अध्धयन कर रहे हैं उसमें काफी सारे मनुष्यों का जिक्र किया हो, आप उनके चरित्र, स्वभाव इत्यादि के बारे में जो भी सीख रहे हैं उनको अपनी नोटबुक में नोट कर दें।

याद रखें जो भी उस भाग में दिया हो उसी में बने रहें ताकि आप हर एक भाग से सीख सकें।

3) इस कहानी या भाग में कौन सी बात पाप है जिसे हमें छोड़ने की आवश्यकता है?

तलवार का तीसरा हिस्सा यानी कि पैना हिस्सा इस बात को सीखने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं कि इस भाग में कौन कौन से पापों का जिक्र किया गया है जिसे हमें छोड़ने की जरूरत है?

हो सकता है कि किसी भाग का अध्ययन करके आप बहुत लंबी सूची तैयार कर लें। उस भाग या कहानी में जो भी या जितने भी पापों का जिक्र हों उन्हें छोड़ने के लिए तैयार रहें। ये तलवार का वो हिस्सा है जो हमें लहूलुहान कर सकता है। मैंने बहुत से विश्वासियों से सुना है कि कई बार उन्होंने महसूस किया है कि प्रचारक सिर्फ उनके बारे में बात कर रहे हैं। ये बात सत्य है कि परमेश्वर का वचन जीवित है और प्रबल है।

ये भी हो सकता है कि जब हम इस प्रश्न को पूछ रहे हैं तो हमारे जीवन के पाप भी प्रभु हमारे सामने लाए, प्रभु से सामर्थ मांगे कि आप उन पापों को छोड़ सकें।

प्रभु यीशु को व्यक्तिगत उद्धारकर्ता स्वीकार करने से पहले मैं अपनी कई गलत आदतों व पापों से दुःखी था और छोड़ना चाहता था मैंने कई बार ईष्ट देवताओं से प्रार्थना की पर मेरे जीवन में कोई बदलाव नहीं आया।

पर विश्वास करने के बाद प्रभु यीशु से मैंने प्रार्थना किया कि प्रभु इन गंदी आदतों को मेरे जीवन से दूर कर दीजिए। आश्चर्यजनक तरीके से प्रभु ने मेरी मदद की और प्रभु ने मेरे जीवन को बदल दिया क्योंकि उसका वचन दोधारी तलवार है।

याद रखें, आप चाहे किसी भी पाप से जूझ रहे हों और छोड़ना चाहते हों। ये अपनी सामर्थ से संभव ही नहीं है, पर जो हमारे लिए असंभव है वो प्रभु के लिए संभव है। उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है।

4) इस कहानी या भाग में से मुझे क्या उदाहरण मिलता है या क्या आज्ञा मिलती है जिसे मुझे अपने जीवन में लागू करने की आवश्यकता है?

तलवार का चौथा हिस्सा जो भी एक पैना हिस्सा है। हो सकता है कि हम जो भी भाग पढ़ रहे हों उससे सीखने के लिए हमें कोई उदाहरण मिले। या कोई आज्ञा भी हो सकती है, जिसे हमें अपने जीवन में लागू करना है।

उदाहरण के लिए हम उस विधवा के बारे में पढ़ रहे हैं जिसने अपनी कमी घटी में भी परमेश्वर को अपना सर्वोत्तम दिया। यहां हम उस विधवा से सीख सकते हैं कि हम अपनी घटी में भी परमेश्वर को सर्वोत्तम दे सकते हैं। (मरकुस 12:41-44)

हो सकता है कि जिस भाग को आप पढ़ रहे हों उसमें सीधे तौर पर कोई आज्ञा दी हो। जैसे कि अपने सताने वालों के लिए प्रार्थना करो, प्रेम करो, क्षमा करो, दिया करो इत्यादि। जब आप अध्ययन कर रहे हों तो आप अपने आप से पूछ सकते हैं कि मैं कैसे इन्हें अपने जीवन में लागू कर सकता हूं।

कुछ जरुरी बातें

अभी तक हमने तलवार विधि (The Effective and Easiest way to study the Bible) से बाइबल अध्ययन करना सीखा है। ये तरीका जल्दी से विश्वासी को एक आज्ञाकारी शिष्य में बदलने का आसान तरीका है, और परमेश्वर के राज्य के लिए अगुवों को तैयार करने का प्रभावशाली तरीका है।

जब आप इस विधि को ग्रुप में सिखाते हैं तो लोगों को उत्तर ढूंढने दें ताकि वो भी इस विधि को अपने अध्ययन में लागू कर दें। इस तरीके से आप किसी लेखांश अथवा भाग को लगभग 6 बार दोहराएंगे। जिससे कि कोई भी भाग या कहानी आसानी से याद हो जाएगी।

यदि हर एक विश्वासी को यह तरीका सिखाया जाए तो वह आसानी से सही शिक्षा और गलत शिक्षा में अंतर कर सकता है। बाइबल अध्ययन का यह तरीका बच्चों, बुजुर्गों यहां तक कि कभी स्कूल नहीं गया व्यक्ति भी आसानी से खुद सीखकर दूसरों को भी सिखा सकता है।

आप आसानी से बहुत से चीजों को ढूंढ कर निकालेंगे और अपने जीवन में लागू कर पाएंगे। इस बात का भी ध्यान रखें कि आप जिस लेखांश को पढ़ रहे हैं उसी में से उत्तर को ढूंढने की कोशिश करें।

हम बहुत बार इस तरह के बाइबल अध्ययन में “लेखांश” की जगह “कहानी” शब्द का इस्तेमाल करते हैं, ताकि विश्वासी लोग आसानी से समझे, पर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि हम कोई मनगढ़ंत कहानी की बात कर रहे हैं। ये इतिहास की सच्ची घटनाएं हैं जिन्हें हम परमेश्वर के जीवित वचन में पढ़ते हैं।

आशा है कि आप भी अपने प्रतिदिन के बाइबल अध्धयन में इस विधि को इस्तेमाल करेंगे। प्रभु के अनुग्रह से आने वाले समय में हम इसे और भी अभ्यास करेंगे।

शालोम

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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