Paying the Price | मूसा के जीवन से एक सबक | Hebrews 11:24-28

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Paying the Price | मूसा के जीवन से एक सबक (Hebrews 11:24-28) The Impact of Faith on your Life. 

बाइबल में कई विश्वास के हीरो हुए जो कि अपने विश्वास को बचाने के लिए कीमत चुकाने को भी तैयार थे, और उन्होंने एक बड़ी कीमत भी चुकाई। हमारे जीवन में ऐसा समय भी आता है जब हमारे विश्वास का परीक्षण होता है। आज के इस लेखांश में हम मूसा के जीवन में से सीखेंगे कि किस प्रकार उन्होंने अपने नैतिक मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया और अपने विश्वास के संरक्षण के लिए कीमत भी चुकाई। 

इस्राएल के इतिहास में मूसा मुख्य व्यक्ति थे। उन्होंने लोगों को दासत्व से बाहर निकाला। उन्होंने उन्हें नियम दिए। आज के लेखांश में इब्रानियों के लेखक दिखाते हैं कि मूसा उत्कृष्ट रूप से विश्वास के एक पुरुष थे।

मूसा ने अपनी बुलाहट को पूरा करने के लिए कीमत चुकाई। यहां कुछ बातें हैं जिन्हें हम इस लेखांश से सीख सकते हैं कि हम भी अपनी बुलाहट को पूरा करने के लिए कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें। सबसे पहले हम देखते हैं कि मूसा ने इंकार किया।

इंकार किया।

मूसा ने इंकार किया। किस बात का? उसने फिरौन की पुत्री का पुत्र कहलाने से इंकार किया। (इब्रानियों 11:24) वास्तव में उसने अपने उच्च नाम का इंकार किया। मूसा ने अपनी उच्च पदवी और उच्च अधिकार का इंकार किया। आने वाले समय में अगला राजा वो ही हो सकता था, पर जब वह सयाना हुआ तो उसने इंकार कर दिया।

मूसा साधारण बालक नहीं था। वह मिस्र के राजसी घराने में पले – बढ़े और पहले दर्जे की शिक्षा और प्रशिक्षण को पाया। वह भौतिक रूप से सुंदर दिखते थे। (निर्गमन 2:2) आज बहुत से लोग, पैसा, यौन-संबंध और ताकत की लालसा करते हैं। मूसा के पास यह सब बहुतायत में हो सकता था। पर फिर भी मूसा ने इंकार किया।

इंकार करना इतना आसान नहीं है क्योंकि ये कीमत की मांग करता है। प्रभु यीशु ने भी कहा कि यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे तो अपने आप का इंकार करे। या यूं कहे कि “मैं” के लिए कोई जगह नहीं। 

प्रभु यीशु ने भी हमारे लिए उच्च अधिकार और पदवी को छोड़ दिया और शून्य बन गए। (फिलिप्पियों 2:5-7) अगली बात जो हम मूसा के जीवन से सीखते है वो है उसने चुनाव किया।

चुनाव किया।

मूसा ने चुनाव किया। किस बात का? मूसा ने थोड़े दिन पाप के सुख भोगने के बजाय परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना अर्थात दुर्व्यवहार होने का चुनाव किया। (इब्रानियों 11:25) रुत ने भी अपनी सास के साथ दुःख में जीना स्वीकार किया जबकि उसकी जेठानी अपने देवताओं के पास लौट गई। (रुत 1:15-16)

बहुत बार लोग गलत चुनाव करते हैं। ऐसा ही अब्राहम के भतीजे लूत के साथ भी हुआ। जब वे साथ में रहते थे तो झगड़ा न हो इसलिए अब्राहम ने लूत से कहा कि सारा देश तेरे सामने है, अपने लिए चुनाव कर।

तो लूत ने ऐसी जगह का चुनाव किया जो कि आंखों से देखने में काफी उपजाऊ लगती थी लेकिन उस जगह के लोग बहुत ही दुष्ट और पापी थे। (उत्पति 13:8-13) परमेश्वर ने उस जगह और लोगों का विनाश कर दिया। उस दौरान लूत को अपनी पत्नी को भी खोना पड़ा। 

और अभी जब हम मूसा के जीवन से सीख रहे हैं कि किस प्रकार उसने भी पाप में थोड़े दिन सुख भोगने के बजाय, परमेश्वर के लोगों के साथ दुर्व्यवहार होने का चुनाव किया। (इब्रानियों 11:25) प्रभु यीशु ने पहले ही साफ बता दिया है कि उसके पीछे चलना मानों सकरे रास्ते में चलना है। वचन स्पष्टता से बताता है कि जो भी भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। अब चुनाव आपके हाथ में है कि आप क्या चुनते हैं। 

मसीह की खातिर अपमान होने को अधिक मूल्यवान जाना।

अधिक मूल्य के बावजूद – उसने क्या किया? मूसा ने मिस्र के खजाने की तुलना में, मसीह की खातिर अपमान होने को अधिक मूल्यवान जाना। (इब्रानियों 11:26) इस संसार की दृष्टि में तो ये बड़ी ही मूर्खता का काम था, क्योंकि उसने खजाने को अस्वीकार कर दिया। किस लिए? – मसीह के लिए। 

आगे की ओर देखना।

वचन बताता है कि मूसा ने आगे की ओर देखा। (इब्रानियों 11:26) क्या देखा? उसका अनन्त ईनाम। प्रेरित पौलुस भी कहते हैं कि मैं उस पदार्थ को पकड़ने के लिए दौड़ा चला जाता हूं जिसके लिए यीशु ने मुझे पकड़ा था। 

वह आगे कहता है कि मैं एक काम करता हूं जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूलकर आगे की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं ताकि वह ईनाम पाऊं जिसके लिए परमेश्वर ने मुझे मसीह में बुलाया है। (फिलिप्पियों 3:12-14) 

वचन हमें उत्साहित करता है कि हमें आगे की ओर बढ़ना आवश्यक है। क्योंकि हमें परमेश्वर ने एक उद्देश्य के लिए बुलाया और बनाया है। प्रभु यीशु ने भी क्रूस का दुःख सहा, और यह काम प्रभु यीशु ने बड़े आंनद के साथ किया इसके लिए उन्होंने लज्जा की भी चिंता नहीं की। हमें यीशु की ओर ताकने की आवश्यकता है जो कि हमारे विश्वास का निर्माणकर्ता है। (इब्रानियों 12:2)

नहीं डरा।

क्यों और किससे? वचन स्पष्टता से हमें बताता है कि मूसा, राजा के क्रोध से भी डरा नहीं। (इब्रानियों 11:27) उस समय फिरौन सबसे शक्तिशाली राजा था। मूसा परमेश्वर से डरा इसलिए वह मनुष्य से नहीं डरा। वचन हमें बताता है कि हमें उससे डरने की आवश्यकता है जो शरीर और आत्मा दोनों को नष्ट कर सकता है।

दृढ़ रहा।

क्यों? क्योंकि वह अदृश्य को मानो देखता हुआ दृढ़ रहा। (इब्रानियों 11:27) नूह भी 100 वर्षों से अधिक तक, परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार जहाज बनाने में दृढ़ रहा। इन वर्षों में उसने ना जाने कितने ताने सुने होंगे पर वह दृढ़ बना रहा। (इब्रानियों 11:36)

फसह का पालन किया।

दूसरे शब्दों में कहें तो मूसा ने परमेश्वर के वचन का पालन किया। (इब्रानियों 11:28) क्योंकि आज्ञाकारिता बलिदान से उत्तम है। (1 शमूएल 13:13, 15:22, 23) मूसा ने उस वक्त विश्वास कर लिया था कि बिना लहू बहाए छुटकारा अर्थात बचाव नहीं।

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क्या आप भी परमेश्वर पर विश्वास करते हैं तो आपको भी इन विश्वास के हीरों की तरह कीमत चुकाने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। विश्वास का अर्थ है भरोसा करना कि परमेश्वर आपको सुरक्षाहीन नहीं छोड़ेंगे।

विश्वास वह चिड़िया है जो गाती है जब सुबह होने से पहले अंधेरा होता है। – रवींद्रनाथ टैगोर

वास्तव में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता। हां सिर्फ हमें उद्धार मुफ्त में मिला है पर इसके लिए भी प्रभु ने एक महान कीमत चुकाई है। किसी ने कहा है कि “पहाड़ जितना अधिक ऊंचा होगा उतनी ही तेज हवा वहां होगी, इसी प्रकार जितना उच्च हमारा जीवन होगा वहां उतनी ही तेज परीक्षण भी होगा।” जितनी बड़ी कीमत आप चुकाते हैं उतना ही बड़ा ईनाम भी आपको मिलेगा।

जो कीमत आप चुकाते हैं वो अपमान हो सकता है, तभी यीशु ने कहा कि मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे बैर करेंगे। जो कीमत आप चुकाते हैं वो आपका सामाजिक बहिष्कार हो सकता है, हो सकता है कि आपको थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़े पर याद रखिये जो परमेश्वर की बाट जोहते हैं वे नया बल प्राप्त करते हैं।

जो कीमत आप चुकाते हैं हो सकता है कि आपको भौतिक सम्पति की हानि सहन करनी पड़े, या सताव का सामना करना पड़े, पर याद रखिये धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताये जाते हैं क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। या हो सकता है कि आपको अपने प्राणों की भी हानि उठानी पड़े पर याद रखिये प्रभु यीशु ने क्या कहा? “जो कोई मेरे लिए अपने प्राण को खोएगा वह उसे पायेगा।” (मती 16:25)

“यदि कोई मेरे पीछे चलना चाहे तो अपने आपका इंकार करे।” (मती 16:24) यहां एक कीमत चुकाने की बात कही गई है। क्या आप भी तैयार हैं कीमत चुकाने के लिए?

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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