Responsibility And Work? | बाइबल हमारे काम और जिम्मेदारी के बारे में क्या सिखाती है?

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Responsibility And Work? बाइबल हमारे काम और जिम्मेदारी के बारे में क्या सिखाती है? मसीह मेरे प्रिय, आशा करता हूं कि आप प्रतिदिन अपने मसीही जीवन में उत्तरोतर बढ़ते जा रहे हैं। इस दुनियां में रहते हुए हमें धन की भी आवश्यकता होती है पर इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नहीं है की धन संपत्ति ही सब कुछ है। आज मनुष्य धन के प्रति यहाँ तक सोचता है कि धन-संपत्ति से ही मेरी सांसे चल रही हैं।

परमेश्वर का वचन हमें यही सिखाता है कि किसी का भी जीवन उसकी धन-संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। (लूका 12:15) आज हम धन के प्रति अपने रवैए को बाइबल आधारित शिक्षा से दुरुस्त करेंगे। मुझे आशा है कि धन के प्रति आपके नजरिए में बदलाव जरूर आएगा।

परमेश्वर हमसे प्रेम करता है। परमेश्वर हमारा ध्यान रखता है, इस कारण रुपयों के प्रयोग या इस्तेमाल के विषय में उसने हमें कुछ निर्देश दिये हैं, ताकि यह हमारे भले के लिये हो और हमें इससे खुशी मिले। उसके विचार हमारे विचारों से कहीं उत्तम हैं, उसकी सोच और हमारी सोच में जमीन और आकाश जितना अंतर है। (यशायाह 55:8-9)

बाइबल में धन से सम्बंधित लगभग 2350 बार लिखा गया है। यीशु मसीह ने भी और किसी विषय के बजाय धन के विषय में बहुत कुछ कहा है। यीशु ने इतना अधिक दो कारणों से सिखाया:

  • आध्यात्मिक कारण से।
  • व्यवहारिक कारण से।

धन के व्यवहार के आध्यात्मिक कारण।

Table of Contents

हम रूपये का व्यवहार किस तरह करते हैं इसका बड़ा ही प्रभाव प्रभु यीशु के साथ हमारे रिश्ते पर पड़ता है। जो भी धन सम्पति हमारे पास सौंपी गई है उसके प्रति हमें विश्वासयोग्य रहना है फिर चाहे वो किसी और का भी हो। (लूका 16:11) प्रभु यीशु मसीह के साथ अधिक निकटता का संबंध ही जीवन में “सच्चा धन” है।

रूपया हमारे जीवन में प्रभु यीशु की बराबरी में प्रभुता करता है। प्रभु यीशु के साथ धन मुख्य प्रतिस्पर्धी है। (मत्ती 6:24) बाइबल में रूपया और संपति के संबंधित 2,350 से ज्यादा पद दिए गए हैं। रूपया और संपति अपने आप में बुरे नहीं हैं। “रूपयों का लोभ अर्थात रुपयों से प्रेम सब प्रकार की बुराईयों की जड़ है।” (1 तीमुथियुस 6:10)

धन के व्यवहार के व्यवहारिक कारण।

परमेश्वर जानता है कि धन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। परमेश्वर हम से प्रेम करता है इसलिए उसने पैसों का बुद्धिमानी के साथ उपयोग करने के लिए हमें निर्देश दिये हैं। परमेश्वर के वचन में कई सिद्धांत प्रस्तुत किये गये हैं – काम के क्षेत्र में, देने के क्षेत्र में, खर्च करने के क्षेत्र में, बचत करने के क्षेत्र में, ऋण से मुक्त होने के क्षेत्र में, परिवारिक योजना के क्षेत्र में, बच्चों को रूपये के व्यवहार के विषय शिक्षा देने के क्षेत्र में कि पैसों का उपयोग किस तरह किया जाता है।

धन के विषय में परमेश्वर की जिम्मेदारियाँ और हमारी जिम्मेदारियाँ।

कुछ लोगों को यह सोचना कठिन लगता है कि परमेश्वर उनके धन में दिलचस्पी रखता है क्योंकि परमेश्वर अदृश्य है। परंतु बाइबल यह बतलाती है कि धन और संपत्ति के विषय में परमेश्वर की भूमिका हमारे धनों के व्यवहार अथवा इस्तेमाल के विषय में जिम्मेदारियाँ विभाजित की गई है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो, परमेश्वर की एक भूमिका है और हमारी एक भूमिका है। परमेश्वर की कुछ जिम्मेदारियाँ हैं और उसने हमें कुछ जिम्मेदारियाँ दी है। धन के व्यवहार में कई बार हम निराश हो जाते हैं क्योंकि हम पहचान नहीं पाते हैं कि कौन सी हमारी जिम्मेदारियाँ है और कौन सी नहीं। आइए सबसे पहले परमेश्वर की जिम्मेदारियों के बारे बात करते हैं।

परमेश्वर की जिम्मेदारियाँ।

सारी वस्तुओं का स्वामित्व परमेश्वर के हाथ में है।

परमेश्वर का पवित्र वचन हमें बताता है कि पृथ्वी और जो भी कुछ उसमें है वो सब कुछ परमेश्वर ही का है; अर्थात उसमें रहने वाले भी। (भजन सहिंता 24ः1) स्वर्ग और पृथ्वी और जो कुछ उसमें है, वह सब तेरे परमेश्वर के ही हैं। (व्यवस्थाविवरण 10ः14) भूमि परमेश्वर की है और सदा के लिए बेची न जाए उसमें तुम परदेशी और बाहरी होगे। (लैव्यव्यवस्था 25ः23)

सोना और चांदी भी परमेश्वर का ही है। (हाग्गै 2ः8) परमेश्वर कहते हैं कि वन के जीव जंतु, पहाड़ों के जानवर भी मेरे हैं और मैदान पर चलनेवाले जानवर भी मेरे हैं, जगत और जो कुछ भी है वो मेरा है। (भजन संहिता 50ः10-12)

परमेश्वर सारी बातों पर नियंत्रण रखता है।

आकाश, पृथ्वी और समुद्र में जो कुछ परमेश्वर ने चाहा है वही किया है। (भजन संहिता 135:6) परमप्रधान परमेश्वर धन्य है, परमेश्वर स्वर्ग की सेना और पृथ्वी के रहने वालों के बीच में अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है कोई भी परमेश्वर को रोककर यह नही कह सकता है कि तूने ये क्या किया है? (दानिय्येल 4:34-35)

जितने लोग मसीह के पीछे चलते हैं और परमेश्वर से प्रेम करते हैं उन्हें इस बात से संतुष्टि होगी कि परमेश्वर हर बात का उपयोग हमारी अंतिम भलाई के लिए करता है फिर चाहे वो कठिन परिस्थितियों ही क्यों न हों। (रोमियों 8:28, उत्पति 45:5-8, 50:20)

परमेश्वर हमारी जरूरतों को पूरा करेगा।

परमेश्वर ही है जो हमारी जरुरतों को पूरा करता है। उत्पत्ति 22:14 में परमेश्वर को यहोवा यिरे कहा गया है, जिसका अर्थ है, परमेश्वर उपाय करेगा। परमेश्वर प्रबन्ध करने वाला परमेश्वर है वह हमारे मांगने से पहले ही जानता है कि हमारी आवश्यकताएं क्या हैं।

प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के उपाय को अपने जीवन देखा था तभी हमें वो बता पाया कि परमेश्वर अपने धन के अनुसार जो प्रभु यीशु मसीह में है तुम्हारी हर एक कमी को पूरा करेगा। (फिलिप्पियों 4:19)

परमेश्वर हम से वादा करता है कि यदि हम परमेश्वर को अपने जीवन में प्रथम स्थान देंगे तो वह हमारी जरुरतों को पूरा करेगा। (मत्ती 6:33) वह हमारी जरुरतों को पूरा करने में विश्वासयोग्य है। वह अपने लोगों की जरुरतों को कई तरह से और अद्भुत रीति से पूरा करता है – वेतन में बढ़ती या कोई ईनाम या बचत किये हुए पैसों की प्राप्ति। वह हमारी जरुरतों को पूरा करने के लिए जो भी तरीका अपनाए, यह बात स्पष्ट है कि वह पूर्ण रीति से विश्वसनीय और निर्भर रहने के योग्य है।

परमेश्वर आपकी थोड़ी सी चीज को बहुगुणित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए एलिशा और विधवा (2 राजा 4:1-7), एलिय्याह और सारपत की विधवा (1 राजा 17:8-16) के लिए परमेश्वर के उपाय को तो आप जानते ही हो। प्रभु यीशु ने पांच रोटी और दो मछलियों को पांच हजार लोगों को खिलाया। (मती 14:13-21)

पैसे के सम्बन्ध में हमारी जिम्मेदारियाँ।

हम परमेश्वर की संपत्ति के भण्डारी हैं। हमें विश्वासयोग्य रहना है। भण्डारी में विश्वासयोग्यता देखी जाती है। (1कुरिन्थियों 4:2) जो कुछ हमारे पास है उसमें, छोटी-छोटी बातों में हमें विश्वासयोग्य रहना है। क्योंकि जो थोड़े से थोड़े में सच्चा है, वह बहुत में भी सच्चा है, और जो थोड़े से थोड़े में अधर्मी है, वह बहुत में भी अधर्मी है। (लूका 16ः10)

जब हम विश्वासयोग्य रहेंगे, तब हमें तीन तरह से लाभ होगा:

  • हम प्रभु यीशु की नजदीकी में बढ़ेंगे। (यूहन्ना 14:21)
  • हममें ईश्वरीय चरित्र का विकास होगा।
  • हमारे जीवन में आर्थिक स्थिरता आरंभ होगी।

धन के प्रति विभिन्न दृष्टिकोण।

धन के प्रति हर एक व्यक्ति का अपना एक दृष्टिकोण है। धन के प्रति गरीब लोगों का मानना है कि सम्पन्नता बुरी है, सपन्न लोगों का मानना है कि सम्पन्नता मेरा अधिकार है और भंडारी का मानना ये है कि धन सम्पति का प्रबंधन मेरी जिम्मदारी है। काम करने के पीछे दरिद्र व्यक्ति का दृष्टिकोण है कि मैं तो काम अपनी मूल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करता हूँ, संपन्न व्यक्ति इसलिए काम करता है कि अधिक धनवान बनूँ और भंडारी इसलिए धन कमाता है कि और अधिक मसीह की सेवा और उसके राज्य के विस्तार में अपना योगदान दे सकूँ।

धार्मिकता के लिए दरिद्र व्यक्ति का दृष्टिकोण है कि धर्मीं लोगों को दरिद्र होना चाहिए, संपन्न व्यक्ति का दृष्टिकोण है कि धर्मीं लोगों को धनवान होना चाहिए जबकि भंडारी का दृष्टिकोण ये है कि उसे धन सम्पति के प्रबंधन में विश्वासयोग्य होना चाहिए। दरिद्र लोगों का मानना है कि अधर्मी लोग धनवान होते हैं, सम्पन्न व्यक्ति सोचता है कि अधर्मी लोग दरिद्र होते हैं और भंडारी का दृष्टिकोण कहता है कि अधर्मी लोग विश्वासयोग्य नहीं होते हैं।

दरिद्र व्यक्ति का देने के पीछे मानना ये होता है कि मुझे तो देना ही है, संपन्न व्यक्ति इसलिए देता है कि और पा सके जबकि भंडारी इसलिए देता है क्योंकि वो परमेश्वर से प्यार करता है। इसलिए दरिद्र व्यक्ति का खर्च करना आनंदरहित और भय के साथ होता है, सपन्न का खर्च करना लापरवाही और बर्बाद करने वाला होता है और एक भंडारी अपने धन का प्रबंधन प्रार्थनापूर्वक और जिम्मेदारी के साथ करता है।

दरिद्र व्यक्ति का दृष्टिकोणसम्पन्न व्यक्ति का दृष्टिकोणभण्डारी का दृष्टिकोण
सम्पन्नताबुरी है।मेरा अधिकार है।मेरी जिम्मेदारी है।
मैं काम करता हूँ ताकिमूल आवश्यकताओं को पूरा करूं।धनवान बनूं।मसीह की सेवा करूं।
धर्मी लोगों कोदरिद्र होना चाहिए।धनवान होना चाहिए।विश्वासयोग्य होना चाहिए।
अधर्मी लोगधनवान होते हैं।दरिद्र होते हैं।विश्वास के योग्य नहीं होते हैं।
मैं देता हूँ क्योंकिमुझे देना ही है।मैं और पा सकूं।मैं परमेश्वर से प्यार करता हूँ।
मेरा खर्च करनाआनन्दरहित और भय के साथ होता है।लापरवाही और बर्बाद करनेवाला होता है।प्रार्थनापूर्वक और जिम्मेदारी के साथ होता है।
धन के प्रति विभिन्न दृष्टिकोण

बाइबल हमारे काम के बारे में क्या सिखाती है?

परमेश्वर ने काम का निर्माण हमारे लाभ के लिए किया है।

परमेश्वर ने आदम की रचना के बाद आदम को अदन के बगीचे में रख दिया कि वो उसमें काम करे और उस बगीचे की रक्षा करे। (उत्पति 2ः15) छः दिन तो परिश्रम करना। (निर्गमन 34ः21) काम करना हमारे फायदे के लिए ही है, वचन हमें निर्देश देता है कि अगर कोई काम करना न चाहे तो वो खाने भी न पाए। (2 थिस्सलुनिकियों 3:10)

Responsibility And Work
Contributed by YoMinistry

काम के विषय में परमेश्वर का दृष्टिकोण।

काम जरूरी है। काम चरित्र का विकास करता है। क्योंकि कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं, परंतु आलसी बेगारी में ही पकड़े जाते हैं। (नीतिवचन 12:24) मसीह के लिए काम करते हैं। पवित्र शास्त्र बाइबिल हमें प्रोत्साहित करता है कि जो काम भी हमें मिले उसे पूरी शक्ति के साथ करना है। तन मन से करना है यह समझकर कि हम उस काम को किसी मनुष्य के लिए नहीं पर प्रभु के लिए करते हैं। (कुलुस्सियों 3:23-24)

काम के विषय में परमेश्वर की जिम्मेदारी।

  • परमेश्वर हमें कार्य कुशलता देता है। काम करने के लिए बुद्धि ज्ञान और समझ परमेश्वर ही देता है। (निर्गमन 36:1)
  • परमेश्वर हमें सफलता देता है। युसूफ ने दासत्व में भी खराई और विश्वासयोग्यता के साथ अपने मिस्री स्वामी के घर काम किया। परमेश्वर उसके साथ रहता था। जिसके कारण युसूफ जो भी करता था, परमेश्वर उसके काम में सफलता देता था। (उत्पति 29:2-3)
  • हमारी उन्नति और बढ़ती परमेश्वर के हाथ में है। आशीष न किसी व्यक्ति की ओर से आती है और न किसी दिशा से, परन्तु परमेश्वर की ओर से ही आती है क्योंकि वो ही सच्चा न्यायी है। (भजन सहिंता 75:6-7)

काम के विषय में हमारी जिम्मेदारी।

हम मसीह के लिए काम करते हैं। हम जो कुछ करें, तन मन से करें, यह जानकर कि मनुष्यों के लिए नहीं, परंतु प्रभु के लिए करते हैं। (कुलुस्सियों 3:23-24) हमें परिश्रम करना है। हमें जो काम भी मिले पूरी शक्ति के साथ करना है। (सभोपदेशक 9:10) मेहनती व्यक्ति को हमेशा अनमोल वस्तु मिलती है। (नीति.12:27)

जो काम में आलस करता है वह नुकसान करवाता है। (नीतिवचन 18:9) पौलुस ने एक आदर्श ठहराया वो परिश्रम और कष्ट से रात दिन काम धन्धा करते थे, ताकि तुम में से किसी पर भार न हो….. तुम हमारी सी चाल चलो। (2 थिस्सलुनिकियों 3:8-9)

हमें आवश्यकता से अधिक काम नहीं करना चहिए। विश्राम भी जरुरी है। छः दिन तो काम करना, परंतु सातवें दिन विश्राम करना। (निर्गमन 34:21) हमें अपने मालिकों का आदर करना चाहिए। (1 पतरस 2:18) हमें अपने साथी कर्मचारियों का आदर करना चाहिए, निंदा नहीं। किसी दास की उसके स्वामी से चुगली न करना। (नीतिवचन 30:10)

परिश्रमी व्यक्ति के लिए आशीष।

Responsibility And Work
  • पर्याप्त प्रबंध: (नीतिवचन 6:6-8)
  • संपति: कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं। (नीतिवचन 22:29)
  • अगुवाई: कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं। (नीतिवचन 12:24)

आलसी व्यक्ति के लिए परिणाम।

  • दरिद्रता: “जो काम में ढिलाई करता है वह निर्धन हो जाता है।” (नीतिवचन 22:29)
  • कठिनाई: “आलसी का मार्ग कांटों से रून्धा हुआ होता है।” (नीतिवचन 15:19)
  • मृत्यु: आलसी अपनी लालसा ही में मर जाता है, क्योंकि उसके हाथ काम करने से इन्कार करते हैं। (नीतिवचन 21:25)

सारांश।

परमेश्वर हमसे प्रेम करता है। प्रभु यीशु ने रुपयों और संपति के विषय में इतना कुछ कहा है क्योंकि वह जानता था कि इन सिद्धांतों के पालन से हमें लाभ होगा। परमेश्वर हमारे वस्तुओं का मालिक है और उसने हम में से हरेक को उसमें से कुछ दिया है ताकि हम उसका प्रबंधन करें। वह चाहता है कि हम उसके वचन में दिए गए आर्थिक सिद्धांतों का पालन करें, और परमेश्वर के बुद्धिमान और विश्वासयोग्य भण्डारी बनें।

उसने हमें काम दिये हैं ताकि वह हमारी जरुरतों को पूरा करे और हमारे चरित्र का निर्माण करे। हमें परिश्रम करना है और कुशल बनने का प्रयास करना है, क्योंकि हम वास्तव में प्रभु के लिए कार्य कर रहे हैं। धन के प्रति अपना दृष्टिकोण जरुर जांचें।

शालोम


बाइबल के आर्थिक सिद्धांत जानिए।

Anand Vishwas
Anand Vishwas
आशा है कि यहां पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हम सबको बुलाया है। प्रभु का आनंद हमारी ताकत है।

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