Understanding Spiritual Warfare (आत्मिक युद्ध)

Understanding Spiritual Warfare (आत्मिक युद्ध)

Posted by Anand Vishwas

March 16, 2025

मसीह में मेरे प्रियो, आशा करता हूँ कि आप सभी प्रभु की कृपा से ठीक होंगे। इन दिनों हम आत्मिक युद्ध (Understanding Spiritual Warfare) के बारे में सीख रहे हैं और यहाँ मैं आपके साथ कुछ नोट साझा कर रहा हूँ। मुझे उम्मीद है कि इससे आपको लाभ होगा। इसका ज्यादा लाभ आपको तब होगा; जब आप निम्नलिखित प्रश्नों पर वचन देखकर अमल करेंगे। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूँगा कि परिश्रमी व्यक्ति को हमेशा लाभ होता है। 

जैसा कि आप जानते हैं कि युद्ध का पहला नियम है अपने शत्रु को जानना। अपने विरोधी की ताकत का, उसके आक्रमण की संभावित रेखा और उसके दाँव-पेंच का पूर्ण ज्ञान विजयी बनाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए क्या आप अपने शत्रु – शैतान की युक्तियों को सही और पूर्ण रूप से समझ रहे हैं? क्या आप जानते हैं कि आपका भी एक शत्रु है?

यह अंधकार की शक्तियों के विरुद्ध दैनिक आत्मिक युद्ध (Spiritual Warfare) है। इसका उद्देश्य मसीह के शासन को लागू करना है। आत्मिक युद्ध, प्रभु यीशु मसीह के नेतृत्व में परमेश्वर के राज्य और लोगों की आत्माओं के लिए शैतान के नेतृत्व में अंधकार की शक्तियों के बीच एक सीधा संघर्ष है।

बाइबल स्पष्ट बताती है कि हम में से प्रत्येक, एक आत्मिक युद्ध के बीच में जीवन जी रहा है। चाहे हम इसे जानते हैं या नहीं फिर भी बहुत लोग या बहुत से विश्वासी अपने शत्रु के ख्याल को नज़रअंदाज कर उसे एक काल्पनिक पात्र, सींग और पूँछ वाला मानने की गलती करते हैं। और कई तो शत्रु के डर व ताकत में लीन रहते हैं बजाए परमेश्वर की वास्तविक ताकत में रहने के; जैसा कि आप आने वाले समय में जानेंगे कि इनमें से कोई भी तरीका नहीं दर्शाता है कि हम युद्ध के लिए तैयार हैं और हमें तो एक मसीही होने के नाते प्रत्येक दिन विजय में चलना है।

यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हमें अपने शत्रु के बारे में सही जानकारी हो जो कि लगातार हमें परमेश्वर के प्रति प्रभावकारी सेवाओं को करने में हमारी योग्यता को निरंतर नष्ट करना चाहता है। आने वाले समय में आप परमेश्वर के वचनों की गहराई में जाकर स्वयं खोजेंगे और शैतान के बारे में सत्य जानेंगे। इस सत्य की जानकारी आपको शत्रु के सामने दृढ़ खड़े रहने के योग्य बना देगी। अब सवाल उठता है कि शैतान आखिर कौन है?

शैतान कौन है?

शैतान कौन है? आप उसके बारे में क्या जानते हैं और आपको ये जानकारी कहाँ से मिली? क्या सिनेमा से? किताबों से? विडियो गेम्स से? मसीह के अनुयायी होने के नाते यह ज़रूरी है कि आप सही रूप से जानें कि शैतान कौन है – क्योंकि उसका लक्ष्य आपको व्यक्तिगत रूप में शामिल करना है। बाइबल उसके बारे में बहुत सी बातें बताती है और आज हम उन सत्यों को स्वयं खोजेंगे।

बाइबल, हमें एक स्पष्ट चित्र को प्रस्तुत करती है कि शैतान कौन है और कैसे वह हमारे जीवनों को प्रभावित करता है? साधारण रूप में, बाइबल शैतान की परिभाषा एक ऐसे स्वर्गदूतीए प्राणी के रूप में देती है जो कि अपने दिए हुए पद से पाप के करने के कारण नीचे गिरा दिया गया और अब वह पूरी तरह से परमेश्वर के विरोध में रहते हुए, परमेश्वर के प्रयोजनों को असफल करने के लिए अपनी शाक्ति से प्रयासरत् है। (पढ़ें – शैतान और पाप कहाँ से आया? (Satan and Sin))

शैतान को एक पवित्र स्वर्गदूत के रूप में रचा गया था। यशायाह 14:12 संभवत: शैतान को गिरने से पहले लूसीफर का नाम देता है। यहेजकेल 28:12-14 उल्लेख करता है कि शैतान को एक करूब के रूप में रचा गया था, जो कि स्वर्गदूतों में सबसे उच्च प्राणी के रूप में दिखाई देता हुआ जान पड़ता है। वह अपनी सुन्दरता और पद के कारण घमण्ड से भर गया, और परमेश्वर से भी ऊँचे सिहांसन पर विराजमान होना चाहता था (यशायाह 14:13-14; यहेजकेल 28:15; 1तिमुथियुस 3:6)। शैतान का घमण्ड उसके पतन का कारण बना। यशायाह 14:12-15 में दिए हुए “मैं करूँगा” कथनों पर ध्यान दें। उसके पाप के कारण, परमेश्वर ने उसे स्वर्ग से निकाल दिया।

शैतान इस संसार का हाकिम बन गया (यूहन्ना 12:31; 2 कुरिन्थियों 4:4; इफिसियों 2:2)। वह दोष लगाने वाला है (प्रकाशितवाक्य 12:10), परीक्षा में डालने वाला है (मत्ती 4:3; 1 थिस्सलुनीकियों 3:5), और धोखा देने वाला है (उत्पत्ति 3; 2 कुरिन्थियों 4:4; प्रकाशितवाक्य 20:3)। उसका नाम ही “शत्रु” है या वह जो “विरोध करता” है। उसके एक और पद, इबलीस है, जिसका अर्थ “निन्दा करने वाला” है।”

हांलाकि उसे स्वर्ग से निकाल बाहर किया है, परन्तु वो अभी भी अपने सिहांसन को परमेश्वर से ऊपर लगाना चाहता है। जो कुछ परमेश्वर करता है उस सब की वो नकल, यह आशा करते हुए करता है कि वह संसार की आराधना को प्राप्त कर लेगा और परमेश्वर के राज्य के विरोध में लोगों को उत्साहित करता है। शैतान ही सभी तरह की झूठी शिक्षाओं और संसार के धर्मों के पीछे अन्तिम स्त्रोत है। शैतान, परमेश्वर और परमेश्वर का अनुसरण करने वालों के विरोध में अपनी पूरी शक्ति से प्रयासरत है। परन्तु फिर भी, शैतान का गंतव्य – आग की झील में अनन्तकाल के लिए डाल दिए जाने के द्वारा मुहरबन्द कर दिया गया है (प्रकाशितवाक्य 20:10)।

हम अपना अध्ययन उत्पत्ति के अध्याय 3 से शुरु करेंगे। इस बात को ध्यान में रखिए कि बाइबल सत्य की ओर निरंतर उन्नत करने वाला प्रकाशन है। दूसरे शब्दों में परमेश्वर थोड़ा थोड़ा करके सत्य को प्रकाशित और निर्मित करता है। इस प्रकाशन को आधार बनाकर जिसे उसने पहले प्रकाशित किया। हम इस अध्ययन में शैतान के बारे में पूरा नहीं जान पाएंगे परन्तु इस अध्ययन के अन्त में आप उसे और उसकी युक्तियों को पहचान पाएंगे।

उत्पत्ति 3:1-7 पढ़ें।

  • आपने ‘सर्प’ के बारे में, उसके चरित्र और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा?
  • हव्वा का सर्प को क्या प्रतिउत्तर था और उसने क्या प्रतिक्रिया की?
  • उसकी इस प्रतिक्रिया का क्या परिणाम हुआ?

हव्वा ने फल खाया और अपने पति को भी दिया। तब उनकी आँखे खुल गई जैसे कि सर्प ने वादा किया था। परन्तु कहानी यहाँ समाप्त नहीं होती है।

उत्पत्ति 3:8-13 पढ़ें। 

  • आपने इन वचनों में परमेश्वर के बारे में क्या सीखा?
  • आदम और हव्वा ने अपने व्यवहार और बातचीत के द्वारा परमेश्वर को कैसे उत्तर दिया?
  • आपने सर्प और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा?

परमेश्वर ने आदम व हव्वा से प्रश्न किया। फिर उसने अपना ध्यान चौथे सहभागी की ओर डाला जो कि इन घटनाओं में शामिल था।

उत्पत्ति 3:14-15 पढ़ें।

  • इन वचनों में परमेश्वर किस से कह रहा है और क्या कह रहा है?
  • आपने सर्प और उसके भविष्य के बारे में क्या सीखा?
  • उसका मनुष्य के साथ वर्तमान रिश्ते के बारे में क्या सीखा?

आइए अब हम बाइबल की अंतिम पुस्तक पर चलते हैं, जहाँ हम सर्प की पहिचान के बारे में सीखेंगे। प्रकाशितवाक्य 12:7-10 स्वर्ग में लड़ाई का वर्णन करता है। अभी हमारा ध्यान लड़ाई पर नहीं है बल्कि, सर्प के बारे में अधिक जानना है। जो इस लड़ाई में एक भूमिका निभा रहा है।

प्रकाशितवाक्य 12:7-10 पढ़ें।

  • आपने सर्प के बारे में क्या सीखा?
  • सर्प को किस प्रकार से वर्णित किया गया है? वह किन नामों से जाना जाता है?
  • इसकी तुलना आपने जो उत्पत्ति 3 में देखा उससे कैसे करते हो?
  • सर्प की युक्तियाँ वचन 910 के अनुसार क्या हैं?
  • यदि आपके पास केवल यही दो हिस्से जिन्हें आपने देखा है (उत्पत्ति 3:14-15 और प्रकाशतिवाक्य 12:7-10) दुश्मन की जानकारी के स्त्रोत के रूप में होते तो आप उससे क्या सीखते जिसे आप आपने जीवन में लागू कर सकें?

हमने अपने शत्रु और उसके अभिप्राय के बारे में अब तक महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर ली है परन्तु बाइबल कहीं अधिक जानकारी देती है कि दुश्मन कैसे काम करता है अपने चेलों को इस विषय पर प्रकाशित करने के लिए यीशु ने एक किसान का दृष्टान्त दिया जिसने अपने खेत में बीज बोया। उस रात एक बैरी आया और जंगली बीज उसी मिट्टी में बो दिए। परिणामस्वरूप गेहूँ और जंगली दाने के पौधे साथ-साथ बढ़े। किसान ने जंगली पौधों को रहने दिया, यह जानकर कि जंगली पौधे उखाड़ने से गेहूँ को नुकसान होगा। चेलों ने इस दृष्टांत को उससे समझना चाहा, इस पर यीशु ने यह कहा –

मत्ती 13:37-39 पढ़ें।

  • शत्रु को कैसे वर्णित किया है?
  • शत्रु ने क्या किया? 

शैतान और इब्लीस दोनों एक ही अस्तित्व है – हमारा दुश्मन “शैतान” शब्द पुराने और नए नियम में लगभग 50 बार आया है जबकि इब्लीस पैंतीस बार उपयोग हुआ है और सिर्फ नए नियम में ही आया है। इब्लीस का मतलब है दोष लगानेवाला, झूठी निन्दा करनेवाला। शैतान का मतलब है विरोधी, शत्रु।

इस अगले वचन में हम पाते हैं कि यीशु धार्मिक अगुवों से बोल रहा है जो सत्य को सुनना नहीं चाहते।

यूहन्ना 8:44 पढ़ें।

  • आपने शैतान के बारे में क्या सीखा? कौन से शब्द उसके स्वभाव को बताते हैं?

सारांश

शैतान कौन है? हमने उत्पत्ति में यह सीखा कि वह सर्प था जो कि हव्वा के साथ बगीचे में था। यहाँ वह बड़ा अजगर भी है जो एक दिन नीचे फेंका जाएगा, प्रकाशितवाक्य 12 के अनुसार। इब्लीस शैतान और झूठ का पिता के रूप में जाना जाता है।

परन्तु आज सबसे मुख्य सत्य हमने जाना कि वह हमारा शत्रु है। आरंभ से ही उसने परमेश्वर और उसकी सृष्टि को बिगाड़ने का प्रयास किया। और जो परमेश्वर की सेवा करते हैं, उनका विरोध किया।

‘उत्पत्ति’ 3 में उसने परमेश्वर के वचन पर प्रश्न किए, परमेश्वर के चरित्र पर संदेह उत्पन्न किया और हव्वा को धोखे से वह पेड़ का फल खिलाया जिसे परमेश्वर ने खाने को मना किया था। शैतान आरंभ से ही हत्यारा है और उसमें कुछ भी सच्चाई नहीं।

हम शत्रु को नजरअंदाज नहीं कर सकते और न ही ऐसा व्यवहार कर सकते है कि उसका कोई अस्तित्व नहीं है, परन्तु हमें भयभीत रहने की आवश्यकता भी नहीं है। शैतान के आक्रमण के विरुद्ध बचाव के लिए आवश्यक हर एक वस्तु से परमेश्वर ने हमें सुसज्जित किया है। (इफिसियों 6:10-18)

हमेशा याद रखें कि युद्ध परमेश्वर का है। “मत डरो और तुम्हारा मन कच्‍चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्‍वर का है।” (2 इतिहास 20:15)

इस विषय को अधिक जानने के लिए अगले लेख को भी अवश्य पढ़ें।

शालोम

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आशा है कि यहाँ पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हमें बुलाया है।