हम किस तरह के शत्रु के साथ युद्ध कर रहे हैं?

हम किस तरह के शत्रु के साथ युद्ध कर रहे हैं? (What Kind Of Enemy Are We In Warfare With?)

Posted by Anand Vishwas

March 29, 2025

Spiritual Warfare Enemy? हम किस तरह के शत्रु के साथ युद्ध कर रहे हैं? (What Kind Of Enemy Are We In Warfare With?) पिछले लेख आत्मिक युद्ध में हमने सीखा कि हमारा एक शत्रु है, जो निरंतर हमें नाश करने की ताक में रहता है। वह झूठा, हत्यारा, निरंतर परमेश्वर के लोगों पर दोष लगाने वाला व बहुत धोखेबाज़ है इत्यादि। परन्तु वह कैसे काम करता है? हमें इस शत्रु के बारे में क्या जानने की आवश्यकता है कि हम उसके सामने विजयी होकर खड़े रह सकें और अचानक उसके फंदे में न फंसे? हम इन प्रश्नों के उत्तर आज के अध्ययन में पाएंगे। कृपया अपनी बाइबल खोलें और निम्नलिखित वचनों को पढ़ें और ढूंढें।

यदि शैतान एक खतरनाक शत्रु है तो मसीहियों को उसे हराने के लिए और क्या जानने की आवश्यकता है?

1 पतरस 5:8 पढ़ें।

  • पतरस शैतान का वर्णन कैसे करता है?
  • शैतान क्या करता है और उसका क्या उद्देश्य रहता है?

कुरिन्थ की प्रारम्भिक कलीसिया में विश्वासी लोग एक ऐसे व्यक्ति जिसने अपने पापों का अंगीकार किया और उससे प्रायश्चित किया था, को अपने मध्य फिर से स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। 2 कुरिन्थियों के अगले दो वचन ऐसी ही परिस्थिति में प्रेरित पौलुस के प्रत्युत्तर को दर्शाते हैं।

2 कुरिन्थियों 2:10-11 और इफिसियों 6:11 पढ़ें। 

  • इन वचनों से आपने शैतान और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा?

परमेश्वर ने हमें एक स्पष्ट उदाहरण दिया है कि सचेत रहने का क्या मतलब है और शैतान की युक्तियों के लिए कैसे तैयार रहना है।

मत्ती 4:1-4 पढ़ें। 

  • इन वचनों में आपने यीशु के बारे में क्या सीखा?
  • आपने शैतान और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा?
  • शैतान, यीशु को क्या करने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर रहा था?
  • यीशु ने शैतान के प्रलोभन का उत्तर कैसे दिया?

शैतान का यीशु को प्रलोभन देने का पहला प्रयास विफल रहा परन्तु वह दुबारा कोशिश करने से नहीं चूका। अर्थात उसने फिर से कोशिश की।

मत्ती 4:5-7 पढ़ें।

  • इस लेखांश में आपने शैतान और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा?
  • आपने शैतान की युक्तियों के बारे में इस दूसरे प्रलोभन में क्या सूक्ष्म अंतर देखा?
  • शैतान, यीशु को मंदिर के कंगूरे पर क्यों ले गया?
  • यीशु ने इस प्रलोभन का कैसे प्रति उत्तर दिया?

आइए हम विचार करते हैं शैतान के तीसरे और आखिरी प्रयास पर जो उसने जंगल में यीशु की परीक्षा की कि वह परमेश्वर से स्वतंत्र हो कर चले। 

मत्ती 4:8-11 पढ़ें।

  • इन वचनों में आपने शैतान और उसकी युक्तियों के बारे में क्या सीखा? 
  • एक बार फिर यीशु ने कैसे प्रतिउत्तर दिया?
  • यदि यीशु इस विशेष प्रलोभन में आ जाते तो परमेश्वर के उद्धार की योजना कैसे प्रभावित होती?
  • जैसा कि हमने अध्ययन के आरम्भ में देखा कि हमें सचेत रहना है क्योंकि हमारा शत्रु शैतान इस ताक में रहता है कि किस को फाड़ खाए? (1 पतरस 5:8) विचार विमर्श करें कि अब तक आपने शैतान की चाल और युक्तियों के बारे में क्या सीखा?
  • क्या आप अपने जीवन के किसी भी उस क्षेत्र में कभी परीक्षा में पड़े जहाँ शैतान ने यीशु को लक्ष्य बनाया? आपने उसका सामना कैसे किया?
  • यीशु ने शैतान द्वारा परीक्षा से गुज़र कर एक महान उदाहरण प्रदान किया कि हम भी उस पर चलें। जो हमने यीशु से सीखा उसे स्वयं के जीवन में कैसे अपना सकते हैं?
  • आपके शत्रु के विरुद्ध आपका सबसे बड़ा हथियार कौन सा है?
  • क्या शत्रु की युक्तियों की केवल जानकारी ही काफी है? और क्या जानने की आवश्यकता है? 

सारांश

क्या आपने गौर किया कि कैसे जो युक्तियाँ शैतान ने जंगल में यीशु की परीक्षा में की और जो हव्वा के साथ बगीचे में की, इनमें कितनी समानता थी?

प्रत्येक घटना में शैतान ने परमेश्वर के वचनों को घुमा फिरा कर और भ्रम में डाल कर कहा और धोखा दिया। हर एक परिस्थिति में उसने शारीरिक आवश्यकता, व्यक्तिगत लाभ और सामर्थ्य प्राप्त करने का प्रलोभन दिया। आज शैतान जो इस संसार का हाकिम है अकसर लोगों को इन्हीं तीन विभागों में परीक्षा में लेता है। इसलिए हमें इस वास्तविकता को ध्यान में रखना चाहिए।

कि “जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आँखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उसकी अभिलाषाएँ, दोनों मिटते जाते हैं पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है वह सर्वदा बना रहेगा।” (1 यूहन्ना 2:16-17)

हमें सर्तक रहने की आवश्यकता है। हमारा शत्रु, शैतान हमें नाश करने की ताक में रहता है। वह चतुर और युक्तिबाज और प्रलोभन देने में माहिर है, यह शब्द ‘युक्तियाँ’ जो हमने उसके कार्यशैली से जुड़े हुए देखा, उसकी चतुराई, धूर्तता, चालाकी और धोखा देने को दर्शाता है। इसलिए हमें सचेत रहना चाहिए और उसके शिकंजे में नहीं फंसना चाहिए। परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह हमारी आत्मिक समझ को तीक्ष्ण और हमारी आँखों को शत्रु की युक्तियों के प्रति खुला रखे।

हे पिता, कृपा हमें शत्रु की युक्तियों के प्रति सतर्क व सजग रखें ताकि हम उसके चंगुल में न फँसे। हमें अपने जीवन में आपकी सत्यता में दृढ़ खड़े रहना सिखाइए और जब हम शैतान को दूसरों पर आक्रमण करते देखें तो उनके लिए भी मध्यस्थ की प्रार्थना कर सकें।

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आशा है कि यहाँ पर उपलब्ध संसाधन आपकी आत्मिक उन्नति के लिए सहायक उपकरण सिद्ध होंगे। आइए साथ में उस दौड़ को पूरा करें, जिसके लिए प्रभु ने हमें बुलाया है।